Maharashtra में अल्पसंख्यक स्कूलों में एडमिशन के लिए अब नहीं लगेगा माइनॉरिटी सर्टिफिकेट, सरकार ने जारी की गाइडलाइन
Maharashtra: राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। अल्पसंख्यक विकास विभाग ने एक एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि एडमिशन के समय छात्रों से माइनॉरिटी सर्टिफिकेट क
Maharashtra: राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। अल्पसंख्यक विकास विभाग ने एक एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि एडमिशन के समय छात्रों से माइनॉरिटी सर्टिफिकेट की मांग न की जाए। यह कदम उन छात्रों और अभिभावकों की परेशानी दूर करने के लिए उठाया गया है जिन्हें इस दस्तावेज की वजह से एडमिशन में दिक्कत आ रही थी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सात अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को अलग से कोई माइनॉरिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता है। इसलिए, स्कूल या कॉलेज इस दस्तावेज की जिद नहीं कर सकते। अगर कोई छात्र यह सर्टिफिकेट जमा नहीं कर पाता है, तो उसे एडमिशन देने से मना नहीं किया जा सकता। यह नियम 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए लागू किया गया है और यह 2013 और 2017 में जारी पुराने नोटिफिकेशन की याद दिलाता है।
छात्र अपनी अल्पसंख्यक पहचान साबित करने के लिए अब अन्य मान्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। विभाग ने संस्थानों को सलाह दी है कि वे निम्नलिखित कागजात स्वीकार करें:
- स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट (LC) जिसमें धर्म या मातृभाषा लिखी हो।
- बपतिस्मा (Baptism) सर्टिफिकेट।
- दीक्षा सर्टिफिकेट।
- मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संगठनों द्वारा जारी सर्टिफिकेट।
- माता-पिता द्वारा धर्म या मातृभाषा की घोषणा करने वाला हलफनामा (Affidavit)।
इस फैसले का स्वागत करते हुए महाराष्ट्र राज्य पंजाबी साहित्य अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष बल मलकीत सिंह ने कहा कि इससे छात्रों का अनावश्यक उत्पीड़न रुकेगा। वहीं हबीब ट्रस्ट के चेयरमैन जावेद श्रॉफ ने बताया कि इस एडवाइजरी से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों को परेशानी नहीं होगी। सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और उन्हें सही तरीके से लागू करें।