Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में साफ किया है कि उसने मुसलमानों के लिए आरक्षण खत्म नहीं किया है। सरकार के मुताबिक, साल 2014 में जो 5 प्रतिशत कोटा देने का अध्यादेश (Ordinance) आया था, वह उसी साल दिसंबर
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में साफ किया है कि उसने मुसलमानों के लिए आरक्षण खत्म नहीं किया है। सरकार के मुताबिक, साल 2014 में जो 5 प्रतिशत कोटा देने का अध्यादेश (Ordinance) आया था, वह उसी साल दिसंबर में समय पूरा होने के कारण खत्म हो गया था। अब फरवरी 2026 में जारी किया गया GR सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया है।
क्या है पूरा मामला और 2026 का GR क्यों आया
सरकार ने कोर्ट को बताया कि 17 फरवरी 2026 को जो Government Resolution (GR) जारी किया गया, उसका मकसद पुराने और बेकार हो चुके सर्कुलर को हटाना था। चूंकि 2014 का अध्यादेश कानून नहीं बन पाया था, इसलिए वह दिसंबर 2014 में ही समाप्त हो गया था। सरकार का कहना है कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता, इसलिए यह GR सिर्फ कागजी कार्रवाई को दुरुस्त करने के लिए लाया गया है।
किन लोगों पर होगा असर और क्या रहेगा सुरक्षित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से उन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा जिन्होंने 9 जुलाई 2014 से 23 दिसंबर 2014 के बीच आरक्षण का लाभ लेकर एडमिशन लिया था या नौकरी पाई थी। साथ ही, मुस्लिम समुदाय के वे लोग जो पहले से OBC कैटेगरी में आते हैं, उनके आरक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, अब SBC-A कैटेगरी के तहत जाति और नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जाएंगे।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं
एडवोकेट सैयद एजाज अब्बास नकवी ने इस GR को चुनौती देते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया था। इसके जवाब में सोशल जस्टिस विभाग की डिप्टी सेक्रेटरी वर्षा देशमुख ने हलफनामा दायर कर कहा कि यह केवल एक रूटीन प्रशासनिक कदम है। सरकार ने हाई कोर्ट से इस याचिका को खारिज करने और याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की मांग की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई 2026 को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या मुसलमानों का पूरा आरक्षण खत्म हो गया है?
नहीं, सरकार के अनुसार केवल 2014 के उस अध्यादेश से जुड़े लाभ खत्म हुए हैं जो समय पूरा होने पर खुद ही समाप्त हो गया था। OBC कैटेगरी में आने वाले मुस्लिम समुदाय के आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ा है।
2014 के अध्यादेश का क्या हुआ था?
9 जुलाई 2014 को 5% आरक्षण का अध्यादेश आया था, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा ने इसे स्थायी कानून में नहीं बदला, इसलिए यह 23 दिसंबर 2014 को अपने आप खत्म हो गया था।