Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग के समय को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 6 मई 2026 को जारी किए गए नए सरकारी प्रस्ताव (GR) के मुताबिक, अब शिक्षकों को साल में 30 घंटे के बजाय कुल
Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग के समय को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 6 मई 2026 को जारी किए गए नए सरकारी प्रस्ताव (GR) के मुताबिक, अब शिक्षकों को साल में 30 घंटे के बजाय कुल 50 घंटे की प्रोफेशनल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। यह फैसला नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत लिया गया है ताकि शिक्षकों को 5+3+3+4 वाले नए स्कूली ढांचे और बदले हुए सिलेबस के हिसाब से तैयार किया जा सके।
ट्रेनिंग के घंटों का क्या है नया गणित?
सरकार ने इस 50 घंटे की वार्षिक ट्रेनिंग को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। इसमें से 30 घंटे की ट्रेनिंग शिक्षकों को ऑफलाइन माध्यम से यानी ट्रेनिंग सेंटर जाकर लेनी होगी। वहीं बाकी के 20 घंटे की ट्रेनिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पूरी की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक खास ट्रैकिंग सिस्टम भी बनाया जा रहा है, जो यह देखेगा कि किस शिक्षक ने कितनी ट्रेनिंग पूरी की है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पढ़ाने के आधुनिक तरीकों और डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल में माहिर बनाना है।
शिक्षक संगठनों और जानकारों ने क्यों जताई चिंता?
ट्रेनिंग का समय बढ़ाने के इस फैसले पर राज्य के कई शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। शिक्षण विकास मंच के माधव सूर्यवंशी और अन्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि शिक्षकों पर पहले से ही काम का काफी बोझ है। उनकी मुख्य चिंताएं कुछ इस प्रकार हैं:
- शिक्षक पहले से ही जनगणना, चुनाव ड्यूटी और वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन जैसे कामों में व्यस्त रहते हैं।
- महारष्ट्र प्रिंसिपल्स एसोसिएशन का कहना है कि ट्रेनिंग सामान्य होने के बजाय सीधे तौर पर विषय से जुड़ी होनी चाहिए।
- वाशी के शिक्षकों का कहना है कि अच्छे ट्रेनर्स की कमी की वजह से कई बार ऐसी ट्रेनिंग सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।
- अटेंडेंस और डिजिटल पोर्टल के कामों की वजह से शिक्षकों के पास पढ़ाने के लिए समय कम बच रहा है।
महाराष्ट्र में शिक्षकों के सामने अन्य कौन सी चुनौतियां हैं?
राज्य के शिक्षकों के लिए यह समय काफी चुनौतियों भरा है क्योंकि सरकार कई बड़े बदलाव एक साथ कर रही है। फिलहाल 22 अप्रैल से ही कई शिक्षकों को ट्रेनिंग और जनगणना जैसे दोहरे कामों की वजह से एफआईआर (FIR) का डर सता रहा है। इसके अलावा 50 साल से अधिक उम्र के करीब 1.1 लाख शिक्षकों को सितंबर 2027 तक टीईटी (TET) पास करने का अल्टीमेटम मिला हुआ है। एससीईआरटी (SCERT) ने भी मई महीने में कक्षा 2 से 4 तक के शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग शेड्यूल कर दी है, जिससे शिक्षकों की छुट्टियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
शिक्षकों के लिए अब कुल कितने घंटे की ट्रेनिंग जरूरी है?
महाराष्ट्र सरकार के नए आदेश के अनुसार अब शिक्षकों को हर साल 50 घंटे की ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसमें 30 घंटे ऑफलाइन और 20 घंटे ऑनलाइन मोड में होंगे।
यह ट्रेनिंग प्रोग्राम किस नीति के तहत लाया गया है?
यह नया नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के मानकों को लागू करने और नए 5+3+3+4 पाठ्यक्रम ढांचे के अनुसार शिक्षकों को तैयार करने के लिए लाया गया है।
क्या 50 साल से ऊपर के शिक्षकों के लिए कोई और नियम भी है?
हां, 50 साल से अधिक उम्र के करीब 1.1 लाख शिक्षकों को सितंबर 2027 तक टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य है, वरना उनकी नौकरी पर संकट आ सकता है।