Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने Patanjali Ayurved Ltd और Divya Pharmacy के प्रोडक्ट्स पर हो रही छापेमारी और जब्ती को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला 10 जून 2026 को Bombay High Court में दिए गए आश्वासन के बाद आया है। मामला
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने Patanjali Ayurved Ltd और Divya Pharmacy के प्रोडक्ट्स पर हो रही छापेमारी और जब्ती को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला 10 जून 2026 को Bombay High Court में दिए गए आश्वासन के बाद आया है। मामला आयुर्वेदिक दवाओं के लेबल पर भ्रामक जानकारी देने के विवाद से जुड़ा है, जिस पर अब केंद्र सरकार के रुख का इंतजार किया जा रहा है।
क्यों रुकी Patanjali प्रोडक्ट्स पर छापेमारी?
महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मई और जून 2026 में राज्यभर में अभियान चलाकर करीब 73.24 लाख रुपये की दवाएं जब्त की थीं। आरोप था कि इन दवाओं के विज्ञापन और लेबल भ्रामक हैं और Drugs and Magic Remedies Act, 1954 के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके खिलाफ Patanjali और Divya Pharmacy ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जब तक केंद्र सरकार इस पर कोई एक समान नीति तय नहीं करती, तब तक कार्रवाई रोक दी जाएगी।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं और अब आगे क्या होगा?
Patanjali की तरफ से सीनियर वकील Birendra Saraf ने कहा कि आयुर्वेद में ‘इंडिकेशन लेबलिंग’ का चलन पुराना है और इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने संकेत दिया कि केंद्र सरकार पूरे देश के लिए आयुर्वेदिक लेबलिंग और विज्ञापन के लिए एक समान नियम बनाने पर विचार कर रही है। Bombay High Court ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते के भीतर अपनी स्थिति साफ करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को होगी।
शेयर बाजार और कंपनी पर क्या असर पड़ेगा?
इस कानूनी राहत से Patanjali Foods Ltd जैसी लिस्टेड कंपनियों के लिए अनिश्चितता कम हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि छापेमारी रुकने से कंपनी के कामकाज में आने वाली रुकावटें कम होंगी, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि, भ्रामक लेबलिंग का मुख्य मुद्दा अभी भी कोर्ट में है, इसलिए रेगुलेटरी रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
महाराष्ट्र सरकार ने Patanjali पर छापेमारी क्यों रोकी?
Bombay High Court में दिए गए आश्वासन के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। अब केंद्र सरकार द्वारा आयुर्वेदिक लेबलिंग के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने का इंतजार किया जा रहा है।
इस विवाद की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य विवाद आयुर्वेदिक उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों को लेकर है। महाराष्ट्र FDA का आरोप है कि ये विज्ञापन भ्रामक हैं और Drugs and Magic Remedies Act, 1954 का उल्लंघन करते हैं।