Maharashtra: राज्य सरकार ने गजेटेड और नॉन-गजेटेड अधिकारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को फिलहाल रोक दिया है। मराठी भाषा मंत्री Uday Samant ने इस फैसले की जानकारी दी। यह कदम Maharashtra Navnirman Sena (MNS) और मर
Maharashtra: राज्य सरकार ने गजेटेड और नॉन-गजेटेड अधिकारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को फिलहाल रोक दिया है। मराठी भाषा मंत्री Uday Samant ने इस फैसले की जानकारी दी। यह कदम Maharashtra Navnirman Sena (MNS) और मराठी अभ्यास केंद्र के कड़े विरोध के बाद उठाया गया है।
हिंदी परीक्षा को लेकर क्या था पूरा विवाद
राज्य सरकार के भाषा निदेशालय ने 9 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें 28 जून 2026 को मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में परीक्षा कराने की योजना थी। MNS नेता Sandeep Deshpande ने आरोप लगाया कि सरकार पिछले दरवाजे से हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे BJP का ‘हिंदू, हिंदी, हिंदुस्तान’ एजेंडा बताया और परीक्षा केंद्रों पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
सरकार ने अब क्या फैसला लिया है
विरोध बढ़ता देख मंत्री Uday Samant ने कहा कि परीक्षा को होल्ड पर रख दिया गया है। सरकार अब इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या ऐसी परीक्षाओं की जरूरत है भी या नहीं। साथ ही, 1976 के उन नियमों की भी जांच होगी जिनके तहत यह परीक्षा अनिवार्य की गई थी। मंत्री ने साफ किया कि अगर जरूरत नहीं पाई गई, तो यह परीक्षा दोबारा कभी नहीं होगी।
पुराने नियम और अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
हिंदी परीक्षा का यह सिस्टम 1951 में बॉम्बे सरकार द्वारा शुरू किया गया था। 1976 के नियमों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों ने 10वीं में हिंदी नहीं पढ़ी थी, उनके लिए यह अनिवार्य था। इस मुद्दे पर Shiv Sena (UBT) प्रमुख Uddhav Thackeray ने भी सरकार की आलोचना की और कहा कि महाराष्ट्र की पहचान मराठी भाषा और संस्कृति से जुड़ी है, इसलिए हिंदी थोपना समझ से परे है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी परीक्षा कब होनी थी?
यह परीक्षा 28 जून 2026 को मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों में आयोजित की जानी थी।
हिंदी परीक्षा के नियम कब बने थे?
हिंदी भाषा परीक्षा की शुरुआत 1951 में हुई थी और बाद में 1976 में इसके लिए विशेष नियम (Maharashtra Civil Services Rules) बनाए गए थे।