Maharashtra में FDA की कार्रवाई पर भड़के होटल मालिक, बोले- बिना कानूनी प्रक्रिया के नाम और फोटो न शेयर करे विभाग

Maharashtra: राज्य में खाने-पीने की दुकानों और होटलों के खिलाफ Food and Drug Administration (FDA) द्वारा चलाए जा रहे अभियान का अब होटल मालिकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाली बड़ी संस्थाओं ने

Maharashtra: राज्य में खाने-पीने की दुकानों और होटलों के खिलाफ Food and Drug Administration (FDA) द्वारा चलाए जा रहे अभियान का अब होटल मालिकों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाली बड़ी संस्थाओं ने मांग की है कि जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी बिजनेस का नाम, फोटो या वीडियो सार्वजनिक न किया जाए।

30 जुलाई 2026 को Hotel and Restaurant Association (Western India), National Restaurant Association of India (NRAI) और Indian Hotel and Restaurant Association (AHAR) ने एक साझा बयान जारी किया। इन संस्थाओं ने FDA से अपील की है कि लाइसेंस रद्द करने या सस्पेंड करने से पहले Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 32 के तहत सुधार के लिए नोटिस दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सार्वजनिक रूप से नाम उजागर करने से बिजनेस की छवि खराब होती है, जबकि जांच के नतीजे बाद में बदल भी सकते हैं।

इसी बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने FDA के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि सिर्फ एक-दो कीड़े मिलने पर तुरंत लाइसेंस सस्पेंड करना सही नहीं है। कोर्ट ने इसे एक ‘रियलिस्टिक अप्रोच’ यानी व्यावहारिक नजरिए से देखने की सलाह दी है। हाई कोर्ट ने नवी मुंबई के Park Inn by Radisson होटल का लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि पहले सुधार का मौका देना चाहिए था।

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका मकसद ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग्स, सेफ महाराष्ट्र’ बनाना है। उन्होंने साफ किया कि लाइसेंस सस्पेंड करना एक अस्थायी कदम है, जिससे बिजनेस को अपनी कमियां सुधारने के लिए आमतौर पर दो हफ्ते का समय मिलता है।

इस कार्रवाई की जद में कई बड़े नाम आए हैं, जिनमें क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, RK जुहू जिमखाना, अपर्णा जुहू जिमखाना और पूर्णिमा रेस्टोरेंट शामिल हैं। इसके अलावा BMC मुख्यालय, KEM अस्पताल और हाई कोर्ट परिसर के कैंटीन की भी जांच हुई है। हाई कोर्ट ने FDA को निर्देश दिया है कि वह सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी खाने की जगहों की जांच कर 31 जुलाई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।