Maharashtra में स्कूलों के पास जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक पर बैन, 50 मीटर के दायरे में नहीं बिकेंगे चिप्स और चॉकलेट
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। Food and Drug Administration (FDA) ने राज्य भर के स्कूलों और उनके आसपास 50 मीटर के दायरे में जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा नम
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। Food and Drug Administration (FDA) ने राज्य भर के स्कूलों और उनके आसपास 50 मीटर के दायरे में जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा नमक-चीनी वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह आदेश बुधवार, 29 जुलाई 2026 को जारी किया गया है।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकना है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के हर बच्चे को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले, इसी लक्ष्य के साथ यह आदेश लागू किया गया है। इस नियम के तहत अब स्कूलों के अंदर या बाहर 50 मीटर तक चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, मिठाई, वड़ा पाव और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड नहीं बेचे जा सकेंगे।
यह पूरी कार्रवाई ‘Food Safety and Standards (Safe Food and Balanced Diets for Children in School) Regulations, 2020’ के आधार पर की जा रही है। सरकार ने साफ किया है कि स्कूल कैंटीन, हॉस्टल किचन और मिड-डे मील देने वाले सभी वेंडरों के पास FSSAI का वैध लाइसेंस होना जरूरी है। स्कूलों को अब फल, सब्जियां, मोटे अनाज (millets) और दालों जैसे पौष्टिक खाने को बढ़ावा देना होगा।
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए हर स्कूल में एक Food Safety Display Board लगाया जाएगा और एक फूड सेफ्टी सुपरवाइजर की नियुक्ति होगी। साथ ही, एक हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर या नोडल ऑफिसर भी तय किया जाएगा। प्रशासन हर साल कम से कम दो बार स्कूलों का निरीक्षण करेगा और हर स्कूल से एक फूड सैंपल भी लिया जाएगा।
अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें लाइसेंस रद्द करना, सामान जब्त करना और Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई शामिल है। इस पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल, हेडमास्टर और स्थानीय अधिकारियों को सौंपी गई है। यह नियम राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों (CBSE, ICSE और स्टेट बोर्ड) पर लागू होगा, जिससे करीब 1.08 लाख स्कूलों के दो करोड़ छात्र लाभान्वित होंगे।