Maharashtra में ड्रोन कंपनियों ने सरकार की नई पॉलिसी का किया विरोध, कहा- राज्य छोड़ने को मजबूर होंगे निर्माता
Maharashtra: राज्य सरकार ने ड्रोन, रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस वाहनों के लिए नई ऑटोमेटेड सिस्टम पॉलिसी लागू की है, लेकिन इसे लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। ड्रोन बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने इस पॉलिसी की कड़ी आलोचना की है। कंपनिय
Maharashtra: राज्य सरकार ने ड्रोन, रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस वाहनों के लिए नई ऑटोमेटेड सिस्टम पॉलिसी लागू की है, लेकिन इसे लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। ड्रोन बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने इस पॉलिसी की कड़ी आलोचना की है। कंपनियों का कहना है कि उनकी मुख्य जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है, जिससे राज्य के ड्रोन उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है और निर्माता दूसरे राज्यों में जा सकते हैं।
महाराष्ट्र अनमैन्ड सिस्टम्स पॉलिसी 2026 को कैबिनेट ने 16 जून 2026 को मंजूरी दी थी और यह 18 जून से लागू हो गई। सरकार का लक्ष्य इस पॉलिसी के जरिए 25,000 करोड़ रुपये का निवेश लाना और एक लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है। इसके तहत तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने और 5,000 रिमोट पायलटों को ट्रेनिंग देने की योजना है, जिसमें ‘नमो ड्रोन दीदी’ प्रोग्राम के जरिए 1,000 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया जाएगा।
पॉलिसी में कंपनियों को बिजली सब्सिडी, GST रिइम्बर्समेंट, स्टैंप ड्यूटी में छूट और पेटेंट रजिस्ट्रेशन में मदद देने की बात कही गई है। साथ ही, नागपुर, पुणे, औरंगाबाद, नासिक और मुंबई में पांच ड्रोन टेस्ट और सर्टिफिकेशन सेंटर बनाने का भी फैसला लिया गया है। नियम के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से 2 किलो से ज्यादा वजन वाले कमर्शियल ड्रोन को महाराष्ट्र ऑटोमेटेड सिस्टम्स रजिस्ट्री (MASR) पर रजिस्टर करना जरूरी होगा।
इन तमाम फायदों के बावजूद Airbots Aerospace, Drone Tech Solution, Cerebrospark Innovation और Sagar Defence जैसी कंपनियों के मालिकों ने नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि IT सचिव वीरेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत में उन्होंने जो सुझाव दिए थे, उन्हें पॉलिसी में शामिल नहीं किया गया। कंपनियों ने यह भी कहा कि पॉलिसी बनाने में IT विभाग की भूमिका कम थी और ज्यादातर काम बाहरी कंसल्टेंट्स के जरिए हुआ।
इस मामले को लेकर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने IT मंत्री आशीष शेलार से मुलाकात की और पॉलिसी की तुरंत समीक्षा करने की मांग की। मंत्री शेलार ने भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों की जांच की जाएगी। दूसरी तरफ, IT सचिव वीरेंद्र सिंह ने इस पूरे विवाद पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।