Maharashtra में कॉलेज फीस बढ़ने पर बवाल, 1272 संस्थानों को समय सीमा के बाद मिली मंजूरी; छात्रों पर पड़ेगा बोझ

Maharashtra: राज्य के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता की जेब पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। आरोप है कि Fee Regulating Authority (FRA) ने नियम तय समय सीमा खत्म होने के बाद 1,272 प्राइवेट प्रोफेशनल कॉलेजों की फीस बढ़ाने को मंजूर

Maharashtra: राज्य के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता की जेब पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। आरोप है कि Fee Regulating Authority (FRA) ने नियम तय समय सीमा खत्म होने के बाद 1,272 प्राइवेट प्रोफेशनल कॉलेजों की फीस बढ़ाने को मंजूरी दे दी है, जिससे अब करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने की आशंका है।

युवा सेना नामक संगठन ने इस मामले को उठाते हुए कहा है कि FRA ने महाराष्ट्र के अनएडेड प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस कानून का उल्लंघन किया है। संगठन का दावा है कि फीस प्रस्तावों पर फैसला लेने की आखिरी तारीख 31 मार्च थी, लेकिन FRA ने 27 अप्रैल से 27 जुलाई 2026 के बीच 26 बैठकें कीं और इन कॉलेजों की फीस बढ़ाने का फैसला लिया। इन कॉलेजों में मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और MCA जैसे कोर्स कराए जाते हैं।

युवा सेना के संयुक्त सचिव कल्पेश यादव ने राज्य सरकार को एक आवेदन दिया है। उन्होंने मांग की है कि 31 मार्च की डेडलाइन के बाद दी गई सभी मंजूरियों को तुरंत रद्द किया जाए क्योंकि ये कानूनी रूप से सही नहीं हैं। नियमों के मुताबिक, कॉलेजों को अगले साल की फीस के प्रस्ताव 31 अक्टूबर तक जमा करने होते हैं और FRA को 31 मार्च तक अपना अंतिम फैसला सुनाना होता है।

फिलहाल 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए एक अंतरिम व्यवस्था की गई है। FRA ने कॉलेजों को अनुमति दी है कि जब तक उनके फीस प्रस्तावों की समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक वे 2025-26 सत्र वाली फीस ही ले सकते हैं। अगर बाद में FRA द्वारा तय की गई फीस ली गई फीस से कम निकलती है, तो कॉलेजों को ज्यादा पैसा छात्रों को वापस करना होगा। हालांकि, अगर फाइनल फीस ज्यादा तय होती है, तो क्या कॉलेज छात्रों से और पैसा मांग सकेंगे, इस पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने 22 फरवरी 2026 को इस कानून में बड़े बदलाव किए थे, जिससे छात्रों को फीस और एडमिशन के फैसलों को चुनौती देने का कानूनी अधिकार मिला है। इससे पहले मार्च 2026 में उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने FRA में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का भरोसा दिया था, लेकिन अप्रैल के अंत तक ऐसी किसी कमेटी का गठन नहीं हुआ था।