Maharashtra में ब्लड सेंटर्स की होगी जांच, FDA ने दो सेंटर बंद कराए; अब हर पैकेट पर लगेगा QR कोड

Maharashtra: राज्य में खून की शुद्धता और सुरक्षा को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपना रही है। FDA ने नियमों की अनदेखी करने वाले दो ब्लड सेंटर्स को बंद करने के बाद अब पूरे राज्य के सरकारी और प्राइवेट ब्लड बैंकों की जांच के आदेश

Maharashtra: राज्य में खून की शुद्धता और सुरक्षा को लेकर सरकार अब सख्त रुख अपना रही है। FDA ने नियमों की अनदेखी करने वाले दो ब्लड सेंटर्स को बंद करने के बाद अब पूरे राज्य के सरकारी और प्राइवेट ब्लड बैंकों की जांच के आदेश दिए हैं। इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि मरीजों को मिलने वाला खून पूरी तरह सुरक्षित हो और इसमें किसी तरह की हेराफेरी न हो।

यह पूरी कार्रवाई मुंबई के Sir J.J. Metropolitan ब्लड सेंटर और ठाणे के Badlapur स्थित Maya ब्लड सेंटर में मिली बड़ी कमियों के बाद शुरू हुई है। इन सेंटर्स में स्टोरेज, सफाई और रिकॉर्ड रखने के तरीकों में भारी लापरवाही पाई गई थी। मामला इतना गंभीर था कि JJ महानगर ब्लड बैंक के दो अधिकारियों, डॉ. हितेश पगारे और अजय भिसे को नौकरी से निकाल दिया गया है और उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है। उन पर खून की यूनिट्स को गलत तरीके से बांटने और हेराफेरी का आरोप है।

राज्य सरकार अब पारदर्शिता लाने के लिए एक नया सिस्टम लागू करने जा रही है। अब हर ब्लड पैकेट पर QR कोड लगाया जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि खून कहां से लिया गया और किस मरीज को दिया गया। साथ ही, ब्लड बैंकों के लिए एक नया SOP (Standard Operating Procedure) भी तैयार किया जा रहा है। अब राज्य के सभी ब्लड बैंकों का हर तीन महीने में ऑडिट होगा और इसकी जिम्मेदारी सीधे संस्थान के प्रमुखों, जैसे मेडिकल कॉलेजों के डीन और अस्पताल निदेशकों की होगी।

जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अब चेकलिस्ट में 27 की जगह 44 पॉइंट्स रखे गए हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि क्या ब्लड बैंक में जरूरी स्टाफ है, मशीनें सही काम कर रही हैं या नहीं और क्या खून का स्टॉक सरकारी e-Blood Bank पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने साफ कहा है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

जनवरी 2026 में लागू हुई नई पॉलिसी के तहत अब नए ब्लड सेंटर खोलने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अब केवल उन्हीं सेंटर्स को मंजूरी मिलेगी जहां स्वैच्छिक रक्तदान और ब्लड कंपोनेंट अलग करने की सुविधा होगी। इन सेंटर्स को SBTC से NOC लेनी होगी, जो केवल 5 साल के लिए मान्य होगी और उसके बाद उनके प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।