Maharashtra: मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान जरूरी होने जा रहा है। राज्य सरकार 1 मई 2026 से इस नियम को सख्ती से लागू करेगी, जिससे अब परमिट और लाइसेंस रिन्यू करा
Maharashtra: मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान जरूरी होने जा रहा है। राज्य सरकार 1 मई 2026 से इस नियम को सख्ती से लागू करेगी, जिससे अब परमिट और लाइसेंस रिन्यू कराते समय ड्राइवरों की मराठी भाषा की जांच होगी। इस फैसले के बाद ऑटो यूनियनों में भारी नाराजगी है और वे बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
क्या है सरकार का नया नियम और कब से होगा लागू
महाराष्ट्र सरकार मोटर वाहन नियमों, 1989 में बदलाव कर रही है। नए नियम के मुताबिक, पब्लिक सर्विस व्हीकल चलाने वाले सभी ड्राइवरों को मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना आना चाहिए। परिवहन विभाग राज्य के 59 क्षेत्रीय कार्यालयों में इसकी जांच करेगा। अगर कोई ड्राइवर इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने कहा है कि यह यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर बातचीत के लिए जरूरी है और सरकार इसके लिए ट्रेनिंग कोर्स भी शुरू करेगी।
यूनियनों का विरोध और प्रवासियों की चिंता
मुंबई ऑटो रिक्शा यूनियन और ACMSSKSM ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। यूनियनों ने 28 अप्रैल तक नियम वापस लेने की मांग की है, वरना 4 मई 2026 से पूरे राज्य में करीब 15 लाख ड्राइवर हड़ताल पर जा सकते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए हजारों प्रवासी ड्राइवर इस डर से महाराष्ट्र छोड़कर अपने घर लौटने लगे हैं कि उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी। दूसरी तरफ, MNS इस फैसले का समर्थन कर रही है और ड्राइवरों को मराठी सिखाने के लिए रोडसाइड क्लास चला रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी नियम कब से लागू होगा?
यह नियम 1 मई 2026 से लागू होगा, जिसके तहत लाइसेंस रिन्यूअल और परमिट के समय मराठी भाषा की योग्यता जांची जाएगी।
अगर ड्राइवर मराठी नहीं जानता तो क्या होगा?
नियम का पालन न करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है, हालांकि सरकार गैर-मराठी भाषियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने का वादा कर रही है।
ड्राइवर यूनियन कब से हड़ताल शुरू कर सकते हैं?
अगर सरकार ने 28 अप्रैल तक नियम वापस नहीं लिया, तो 4 मई 2026 से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू हो सकता है।