Lucknow में आजादी के पर्व की तैयारी, 150 महिलाएं बना रही हैं 5 लाख तिरंगे

Lucknow: आजादी के पर्व 2026 से पहले लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में सिलाई मशीनों की गूंज बढ़ गई है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत शहर और आसपास के इलाकों में फहराने के लिए बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा

Lucknow: आजादी के पर्व 2026 से पहले लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में सिलाई मशीनों की गूंज बढ़ गई है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत शहर और आसपास के इलाकों में फहराने के लिए बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा रहे हैं। इसमें ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है।

लखनऊ के चिनहट ब्लॉक के सिकंदरपुर खुर्द गांव में रेणू और गुड्डी यादव समेत करीब 150 महिलाएं दिन-रात तिरंगे सिलने में जुटी हैं। यहाँ के तुलसी मां, छोटे साहब और बजरंगबली जैसे स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 1.50 लाख झंडे बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिनमें से 1.30 लाख से ज्यादा तैयार हो चुके हैं। यूपी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के मिशन डायरेक्टर अरुण कुमार ने इन केंद्रों का निरीक्षण भी किया है।

पूरे उत्तर प्रदेश में इस अभियान का दायरा बहुत बड़ा है। राज्य सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 2 करोड़ तिरंगे बनाने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से 11 अगस्त तक करीब 1.90 करोड़ झंडे तैयार कर लिए गए। इस काम में राज्यभर के 6,000 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 30,000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

मजदूरी को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट हैं। लखनऊ के कुछ इलाकों में एक झंडे पर 3 रुपये मिलने की बात कही गई है, जबकि प्रयागराज और भदोही जैसे जिलों में महिलाओं को झंडे के साइज के हिसाब से 20 रुपये से 50 रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला बताया है।

प्रशासन ने निर्देश दिया है कि सभी झंडे ‘भारतीय ध्वज संहिता’ (Flag Code of India) के नियमों के अनुसार ही बनाए जाएं। झंडों का अनुपात 3:2 होना चाहिए और इन्हें सूती, पॉलिएस्टर, रेशम या खादी के कपड़े से बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के 5 करोड़ घरों में तिरंगा फहराने का लक्ष्य रखा है।