UP: लखनऊ के 90 साल पुराने विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को खाली कराने के मामले में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। स्कूल में पढ़ने वाली करीब 250 लड़कियों और उनके अभिभावकों ने स्कूल बंद होने के खिलाफ विरोध जताया है। जिला प्रशास
UP: लखनऊ के 90 साल पुराने विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को खाली कराने के मामले में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। स्कूल में पढ़ने वाली करीब 250 लड़कियों और उनके अभिभावकों ने स्कूल बंद होने के खिलाफ विरोध जताया है। जिला प्रशासन ने अब स्कूल प्रबंधन को अपने कागजात पेश करने का निर्देश दिया है ताकि मामले का सही समाधान निकाला जा सके।
स्कूल खाली कराने का पूरा मामला क्या है?
यह स्कूल 1935-36 के आसपास बना था और यहाँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियां पढ़ती हैं। 4 जून 2026 को ADM कोर्ट के आदेश पर पुलिस की मौजूदगी में स्कूल परिसर को खाली कराया गया। इस दौरान फर्नीचर और पढ़ाई के रिकॉर्ड हटा दिए गए। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह जमीन करीब एक सदी पहले शिक्षा के लिए दान की गई थी, जबकि दूसरी पार्टी एक फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर कब्जा मांग रही है।
प्रशासन और अन्य पक्षों का क्या कहना है?
DM विशाख जी ने छात्रों के विरोध और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई अपील पर संज्ञान लिया है। ADM सिटी महेंद्र पाल के मुताबिक, पिछले साल के कानूनी आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई थी। वहीं, हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि डॉ. आभा गोयल की अपील पर कब्जा सौंपा गया। स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में लैंड माफिया के शामिल होने का आरोप लगाया है।
छात्रों और शिक्षकों का विरोध क्यों बढ़ रहा है?
अभिभावकों और छात्रों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि स्कूल फिर से खुल सके। समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी इसका विरोध किया है और इसे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के खिलाफ बताया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर मामला हल नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई जिला अदालत में 2 जुलाई को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विद्या मंदिर स्कूल को कब और क्यों खाली कराया गया?
स्कूल को 4 जून 2026 को ADM कोर्ट के आदेश पर खाली कराया गया। डॉ. आभा गोयल ने परिसर के कब्जे के लिए अपील की थी, जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में यह कार्रवाई हुई।
स्कूल प्रबंधन का इस मामले पर क्या दावा है?
मैनेजर संतोष रस्तोगी और प्रिंसिपल रश्मि यादव का दावा है कि जमीन शिक्षा के लिए दान की गई थी और विपक्षी पार्टी फर्जी रजिस्ट्री का इस्तेमाल कर रही है।