UP : लखनऊ विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता के आरोप में तीन छात्रों को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में छात्र पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि वे केवल फीस वृद
UP : लखनऊ विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता के आरोप में तीन छात्रों को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में छात्र पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि वे केवल फीस वृद्धि के खिलाफ अपनी बात रखने कुलपति से मिले थे, लेकिन उन पर गलत आरोप लगाकर यह कदम उठाया गया है।
किन छात्रों को निकाला गया और क्या हैं आरोप?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रेम प्रकाश यादव (एमए हिंदी), शशि प्रकाश (एमए लोक प्रशासन) और हर्षित शुक्ला (एलएलबी) को निष्कासित किया है। प्रशासन का कहना है कि इन छात्रों ने कुलपति कार्यालय का घेराव किया, उनके रास्ते में बाधा डाली और परिसर में बिना अनुमति के प्रदर्शन किया। वहीं छात्रों का आरोप है कि उन पर 8-9 एफआईआर दर्ज की गई हैं और उन्हें केवल सवाल पूछने की सजा दी गई है।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- निष्कासन के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।
- यूनिवर्सिटी द्वारा की गई फीस वृद्धि को रद्द किया जाए।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई की दोबारा निष्पक्ष जांच हो।
- विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज में पारदर्शिता लाई जाए।
राजनीतिक समर्थन और वर्तमान स्थिति
इस आंदोलन को अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद, कांग्रेस नेता रुद्र दमन सिंह बब्लू और सपा नेता रविदास मेहरोत्रा समेत कई बड़े नेताओं का समर्थन मिला है। धरने पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके विरोध स्थल से बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने फरवरी 2026 में एक नई अनुशासन नीति लागू की थी, जिसमें सीधे निष्कासन के बजाय सामुदायिक सेवा का प्रावधान था, लेकिन इस मामले में सख्त कार्रवाई की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों का विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
छात्र तीन साथियों के निष्कासन और यूनिवर्सिटी की फीस वृद्धि के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुलपति से मिलने पर उन्हें अनुशासनहीनता के झूठे आरोप में निकाला गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का इस मामले पर क्या कहना है?
प्रशासन का आरोप है कि छात्रों ने कुलपति कार्यालय का घेराव किया और उनके मार्ग में बाधा डाली। प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव के अनुसार, अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी।