UP : लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के निष्कासन और फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार, 9 जून 2026 को आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन को अब पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों और कई राजनीतिक दिग्गजों का समर्थन मि
UP : लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के निष्कासन और फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार, 9 जून 2026 को आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन को अब पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों और कई राजनीतिक दिग्गजों का समर्थन मिल रहा है। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और कुलपति से वार्ता की कोशिश कर रहे हैं।
किन छात्रों पर हुई कार्रवाई और क्या है मामला
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के बाद प्रेम प्रकाश यादव (MA हिंदी), शशि प्रकाश (MA लोक प्रशासन) और हर्षित शुक्ला (LLB) को कदाचार का दोषी पाते हुए निष्कासित कर दिया है। इन तीनों छात्रों पर भविष्य में किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने की स्थायी रोक लगा दी गई है और कैंपस में आने से भी मना किया गया है। इसके अलावा, प्रसन्न शुक्ला और रूपेंद्र बहादुर सिंह पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें 15 दिनों की सामाजिक सेवा करने को कहा गया है। यह पूरी कार्रवाई 28 अप्रैल 2026 को कुलपति कार्यालय में हुई एक घटना के बाद की गई है।
आंदोलन की मुख्य मांगें और समर्थन
छात्रों की मुख्य मांग है कि निष्कासन के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए और फीस में की गई बढ़ोतरी को रद्द किया जाए। बताया जा रहा है कि LLB जैसे कुछ कोर्स की फीस में 50 से 100 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इस लड़ाई में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव और पूर्व लूटा अध्यक्ष नीरज जैन के साथ-साथ सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व सांसद पी.एल. पूनिया और विधायक रविदास मेहरोत्रा जैसे नेता भी शामिल हुए हैं। पूर्व कुलपति प्रोफेसर रूप रेखा वर्मा ने भी छात्रों का पक्ष लेते हुए कहा कि निष्कासन आखिरी रास्ता होना चाहिए और पहले संवाद किया जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्रों के प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या है?
छात्रों का विरोध 28 अप्रैल को हुई घटना के बाद तीन छात्रों (प्रेम प्रकाश, शशि प्रकाश और हर्षित शुक्ला) के निष्कासन और एलएलबी जैसे कोर्स में 50-100% फीस बढ़ोतरी के खिलाफ है।
निष्कासित छात्रों पर प्रशासन ने क्या पाबंदी लगाई है?
प्रॉक्टोरियल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर तीन छात्रों को यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया है और उन्हें भविष्य में किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने या कैंपस में आने की अनुमति नहीं है।