Lucknow University में 18 साल बाद फिर शुरू होंगे D.Litt, D.Sc और LLD कोर्स, जानिए कैसे होगा एडमिशन

UP/Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय 18 साल के लंबे इंतजार के बाद डी.लिट. (D.Litt.), डी.एससी. (D.Sc.) और एलएलडी (LL.D.) जैसे शीर्ष शोध पाठ्यक्रमों में एडमिशन

UP/Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय 18 साल के लंबे इंतजार के बाद डी.लिट. (D.Litt.), डी.एससी. (D.Sc.) और एलएलडी (LL.D.) जैसे शीर्ष शोध पाठ्यक्रमों में एडमिशन फिर से शुरू करने जा रहा है। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने नया अध्यादेश पारित कर दिया है और अब राजभवन से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है।

कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि इन कोर्स की वापसी विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति 2020 के तहत दुनिया के स्तर का शोध और इनोवेशन को बढ़ावा देना है। राजभवन से हरी झंडी मिलते ही एडमिशन के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।

इन कोर्स में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटी ने कड़े नियम बनाए हैं। आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में पीएचडी डिग्री होनी चाहिए। साथ ही पीएचडी पूरी करने के बाद कम से कम पांच साल का टीचिंग, रिसर्च या प्रोफेशनल अनुभव होना जरूरी है। रिसर्च के क्षेत्र में पकड़ साबित करने के लिए उम्मीदवार के नाम पर यूजीसी लिस्टेड जर्नल्स में कम से कम 10 शोध पत्र प्रकाशित होने चाहिए।

विवरण पात्रता और नियम
अनिवार्य डिग्री पीएचडी या उसके समकक्ष उपाधि
कार्य अनुभव न्यूनतम 5 वर्ष (पीएचडी के बाद)
शोध पत्र कम से कम 10 शोध पत्र (प्रथम या करेस्पोंडिंग लेखक)
शोध अवधि न्यूनतम 2 वर्ष से अधिकतम 4 वर्ष
जरूरी दस्तावेज सिनॉप्सिस (1500-3000 शब्द), शोध विवरण और NOC
मूल्यांकन प्री-सबमिशन सेमिनार और 3 स्वतंत्र परीक्षकों की रिपोर्ट

इस बार यूनिवर्सिटी ने ‘सेल्फ सुपरविजन’ की नई सुविधा भी शुरू की है। इसके तहत वे अनुभवी प्रोफेसर या वैज्ञानिक जो पीएचडी के बाद 10 साल का अनुभव रखते हैं और जिनके 15 हाई क्वालिटी रिसर्च पेपर प्रकाशित हैं, वे बिना किसी गाइड के स्वतंत्र रूप से अपना शोध कर सकेंगे।

वहीं, जो छात्र गाइड की मदद लेना चाहते हैं, उन्हें यूनिवर्सिटी एक एडवाइजर देगा। गाइड बनने के लिए प्रोफेसर का कम से कम पांच पीएचडी छात्रों का सफल मार्गदर्शन करना जरूरी होगा। एक प्रोफेसर एक समय में अधिकतम दो छात्रों को गाइड कर सकेगा। प्रवक्ता प्रोफेसर मुकुल श्रीवास्तव के अनुसार, डी.लिट. कला, शिक्षा और वाणिज्य संकायों में, डी.एससी. विज्ञान और इंजीनियरिंग में और एलएलडी विधि संकाय के छात्रों को दी जाएगी।