Lucknow University के दो LLB छात्र निलंबित, Supreme Court में हंगामे और अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर गिरी गाज
UP/Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में बदसलूकी और हंगामे के आरोप में अपने दो LLB छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह सख्त कदम छात्रों द्वारा देश की सबसे बड़ी अदालत की गरिमा को ठेस पहुँ
UP/Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में बदसलूकी और हंगामे के आरोप में अपने दो LLB छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह सख्त कदम छात्रों द्वारा देश की सबसे बड़ी अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाने के बाद उठाया है। निलंबित छात्रों के नाम प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से बाहर कर दिया गया है।
यह पूरा मामला 10 जुलाई 2026 का है, जब प्रबल प्रताप सिंह अपनी एक याचिका (SLP No. 31367/2026) की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 में मौजूद थे। आरोप है कि सुनवाई के दौरान उन्होंने न्यायिक कार्यवाही में बाधा डाली, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कागजात फेंककर सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। उस समय जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने तिलक मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की। 15 जुलाई 2026 को पुलिस ने प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान को गिरफ्तार कर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने जांच के दौरान उनके पास से आपत्तिजनक भाषा वाले पर्चे भी बरामद किए। हालांकि, IHBAS के मेडिकल मूल्यांकन में दोनों छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ पाया गया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने 15 जुलाई को एक जांच समिति बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। विश्वविद्यालय ने न केवल छात्रों को निलंबित किया है, बल्कि उनकी हॉस्टल सुविधा भी खत्म कर दी है और उन्हें कैंपस में घुसने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी इस घटना की निंदा की है और कोर्ट रूम की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के लिए नए नियम बनाने की मांग की है।