Lucknow में रेंटल घर ढूंढने में ट्रांस कम्युनिटी को मिल रही परेशानी, मकान मालिकों का रवैया अब भी पुराना
Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रांसजेंडर्स के लिए किराए पर कमरा या घर ढूंढना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाज की पुरानी सोच और भेदभाव की वजह से इस कम्युनिटी के लोगों को मकान मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। कई बार मकान माल
Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रांसजेंडर्स के लिए किराए पर कमरा या घर ढूंढना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समाज की पुरानी सोच और भेदभाव की वजह से इस कम्युनिटी के लोगों को मकान मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। कई बार मकान मालिक और ब्रोकर उनकी पहचान जानकर उन्हें घर देने से साफ मना कर देते हैं।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रांस कम्युनिटी के लोग अपनी पहचान छुपाने या घर के लिए बहुत दूर तक भटकने को मजबूर हैं। लखनऊ के कई हाउसिंग सोसायटियों जैसे Parsvnath, Rohtas और Omaxe के Resident Welfare Associations (RWAs) का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी को घर देने से रोके, लेकिन मकान मालिक अपनी पसंद और पड़ोसियों के डर से उन्हें घर नहीं देते। ट्रांस एक्टिविस्ट प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि ट्रांस लोगों के लिए घर ढूंढना महिलाओं और मुस्लिमों के मुकाबले और भी ज्यादा मुश्किल होता है।
कानूनी तौर पर Transgender Persons (Protection of Rights) Act 2019 के तहत किसी भी ट्रांस व्यक्ति को घर खरीदने, किराए पर लेने या रहने से रोकना भेदभाव माना जाता है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए Kinnar Kalyan Board बनाया है और पुलिस थानों में ट्रांसजेंडर सेल की शुरुआत की है। सरकार ने इनके विकास के लिए 200 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित किया है।
सरकार की अन्य कोशिशों में 60 साल से ज्यादा उम्र के ट्रांसजेंडर्स के लिए 18 मंडलों में ‘गरिमा गृह’ (वृद्धाश्रम) बनाने की योजना शामिल है, जहां उन्हें मुफ्त रहना, खाना और इलाज मिलेगा। साथ ही, सामाजिक कल्याण विभाग उनके आईडी कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड बनाने पर काम कर रहा है। यूपी रेवेन्यू कोड 2006 में संशोधन के बाद अब उन्हें कृषि संपत्ति में विरासत का अधिकार भी मिल गया है।