Lucknow में ट्रैफिक डायवर्जन से लोग परेशान, रिहायशी इलाकों में घुस रही हैं सरकारी बसें

Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए किया गया एक्सपेरिमेंटल डायवर्जन अब आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। शहर के आलमबाग और पॉलिटेक्निक जैसे इलाकों में रहने वाले हजारों स्थानीय लोग इस बदलाव से रोज

Lucknow: राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए किया गया एक्सपेरिमेंटल डायवर्जन अब आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। शहर के आलमबाग और पॉलिटेक्निक जैसे इलाकों में रहने वाले हजारों स्थानीय लोग इस बदलाव से रोज परेशान हो रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या तब बढ़ जाती है जब बड़ी सरकारी बसें संकरी रिहायशी गलियों के अंदर घुसने लगती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक सुधारने के नाम पर किए गए इस प्रयोग ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। रिहायशी इलाकों में बसों के आने से न केवल जाम लग रहा है, बल्कि पैदल चलने वालों और छोटे वाहन सवारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी तरफ, शासन स्तर पर ट्रैफिक कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लखनऊ समेत 20 जिलों में C-RTC स्कीम के तहत ट्रैफिक जाम कम करने का काम चल रहा है। इसके साथ ही यूपी पुलिस ने AI आधारित गूगल रियल टाइम ट्रैफिक कंजेशन सिस्टम लागू किया है, जिससे मार्च से जुलाई 2026 के बीच लखनऊ में जाम में 13.67% की कमी दर्ज की गई थी।

भविष्य की योजना के तौर पर लखनऊ को 300 नई एयर कंडीशन इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं, जो 14 अलग-अलग रूटों पर चलेंगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के तहत गांवों को जोड़ने के लिए छोटी बसें चलाने की तैयारी है, ताकि बड़े वाहनों का दबाव मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों पर कम हो सके।