Lucknow में 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का हंगामा, मायावती के आवास का घेराव कर जताया विरोध
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थी बसपा प्रमुख मायावती के आवास पहुंचे और वहां घेराव किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्श
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थी बसपा प्रमुख मायावती के आवास पहुंचे और वहां घेराव किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोंकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।
यह प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन हुआ। इससे पहले शुक्रवार को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास का घेराव किया था। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा दायर एक हलफनामे को लेकर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने जो आंकड़े दिए हैं, वे संतोषजनक नहीं हैं।
अभ्यर्थियों के विरोध का मुख्य कारण पदों की संख्या और आरक्षण की विसंगति है। विभाग ने हलफनामे में कुल 8,270 रिक्त पदों की बात कही है। इसमें 3,324 पद ओबीसी के बताए गए हैं, जिन्हें अभ्यर्थियों के मुताबिक पहले ही भरा जाना चाहिए था। इसके अलावा 4,946 ऐसे पद हैं जिन पर चयनित लोगों ने जॉइन नहीं किया। अभ्यर्थियों की मांग है कि इन पदों को रिक्त मानकर मेरिट लिस्ट में नीचे आने वाले उम्मीदवारों को मौका दिया जाए।
| वर्ग | रिक्त पदों की संख्या (हलफनामे के अनुसार) |
|---|---|
| सामान्य वर्ग | 1,144 |
| ओबीसी (OBC) | 2,524 |
| अनुसूचित जाति (SC) | 1,244 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 34 |
प्रदर्शन का नेतृत्व धनंजय गुप्ता और अमरेंद्र पटेल कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की मौजूदा प्रक्रिया से उन्हें 6,800 के बजाय केवल 3,300 पदों का लाभ मिल रहा है। वे पारदर्शी चयन प्रक्रिया और आरक्षण की गड़बड़ियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक पारदर्शी चयन सूची तैयार करने का समय दिया था। सरकार ने कोर्ट को बताया है कि 9500 और लोगों को समायोजित किया जा सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के एफिडेविट पर सभी पक्षों को 28 जुलाई, 2026 तक अपनी लिखित आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया है।