Lucknow में श्मशान की जमीन पर कब्जे को लेकर बवाल, ग्रामीणों ने Ansal Group के खिलाफ किया प्रदर्शन
Lucknow: राजधानी के पॉश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी के मुजफ्फरनगर घुसवल गांव में श्मशान घाट की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। गांव के लोग इस बात से बेहद नाराज हैं कि प्रॉपर्टी डीलरों ने उनकी आस्था और अंतिम संस्कार
Lucknow: राजधानी के पॉश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी के मुजफ्फरनगर घुसवल गांव में श्मशान घाट की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। गांव के लोग इस बात से बेहद नाराज हैं कि प्रॉपर्टी डीलरों ने उनकी आस्था और अंतिम संस्कार की जगह पर कब्जा कर लिया है। ग्रामीणों ने समाधियों के पास खड़े होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से इस कब्जे को तुरंत हटाने की मांग की है।
विवाद की जड़ खाता संख्या 415 की करीब 10 बीघा जमीन है, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में श्मशान घाट के रूप में दर्ज किया गया है। आरोप है कि बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों ने यहां अवैध रूप से प्लॉटिंग कर दी है और बस्तियां बसा ली हैं। गांव वालों का कहना है कि सालों से इस जगह का इस्तेमाल अंतिम संस्कार के लिए होता रहा है और अब वहां जमीन न बचने से भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
इस मामले में नगर निगम और सरोजनी नगर तहसील की संयुक्त टीम ने मौके का मुआयना किया है। लेखपाल ने माना है कि श्मशान की जमीन के कुछ हिस्से पर कब्जा हुआ है। चूंकि वहां अब काफी आबादी बस चुकी है, इसलिए प्रशासन अब Electronic Total Station (ETS) मशीन से सटीक पैमाइश करेगा। प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर, सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में Ansal Group विवादों में घिरा हुआ है। हाल ही में कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की कई FIR दर्ज हुई हैं। जुलाई 2026 में ही दो अलग-अलग मामलों में करीब 78.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं, जिसमें ग्राहकों ने फ्लैट और प्लॉट के लिए पैसे दिए लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिला। इसके अलावा, 20 जुलाई और 22 जुलाई को भी प्लॉट बेचने के नाम पर लाखों की ठगी के मामले दर्ज हुए हैं।
जून के अंत में भी ग्रामीणों ने मजीहगावां रेलवे क्रॉसिंग के पास सरकारी सड़क पर कब्जे को लेकर Ansal कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी पहले ही ग्राम समाज की जमीन से अवैध कब्जे हटाने और इसमें मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन श्मशान की जमीन को कब तक मुक्त करा पाता है।