Lucknow में आवारा पशुओं का आतंक, अलीगंज में दो सांड़ भिड़े, कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त

Lucknow: राजधानी की सड़कों पर आवारा और छुट्टा पशुओं की समस्या गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार को अलीगंज के सेक्टर ए में दो सांड़ आपस में भिड़ गए, जिससे इलाके में करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। इस घटना में सड़क स

Lucknow: राजधानी की सड़कों पर आवारा और छुट्टा पशुओं की समस्या गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार को अलीगंज के सेक्टर ए में दो सांड़ आपस में भिड़ गए, जिससे इलाके में करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। इस घटना में सड़क से गुजर रहे कई टू-व्हीलर गिर गए और वाहनों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद पशुओं को अलग किया, तब जाकर स्थिति सामान्य हो सकी।

शहर के अलीगंज, महानगर, इंदिरा नगर, गोमती नगर और सरोजिनी नगर जैसे इलाकों से अक्सर आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों की खबरें आती रहती हैं। लखनऊ नगर निगम (LMC) ने इस समस्या से निपटने के लिए शहर के भीतर अवैध डेयरी चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया है। नियमों के मुताबिक, लखनऊ शहर की सीमा में बिना लाइसेंस डेयरी चलाना गैरकानूनी है। नगर निगम एक्ट 1959 के तहत प्रदूषण को देखते हुए शहर में भैंस रखने की अनुमति नहीं है, जबकि लाइसेंस होने पर अधिकतम दो गायें रखी जा सकती हैं।

नगर निगम के एनिमल वेलफेयर ऑफिसर डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि उन्हें निवासियों से ट्रैफिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर की कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि अवैध डेरियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पकड़े गए पशुओं को कांजी हाउस भेजा जाएगा, जिन्हें जुर्माना भरने के बाद ही छोड़ा जाएगा। दूसरी ओर, नगर निगम हाउस में विपक्ष के नेता और पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने प्रशासन की आलोचना की है। उनका कहना है कि कान्हा उपवन गौशाला पहले से ही पूरी तरह भर चुकी है और नई गौशाला का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, जिससे समस्या और बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश के प्रबंधन के लिए बजट में बड़े प्रावधान किए हैं। साल 2026 के बजट में निराश्रित पशुओं के चारे के लिए 2,000 करोड़ रुपये और नई गौशालाओं के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वर्तमान में राज्य में करीब 12 लाख से ज्यादा आवारा पशु 7,600 से अधिक गौशालाओं में रखे गए हैं। सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत 1 लाख 13 हजार से अधिक किसानों को पशु सौंपे हैं, जिन्हें रखरखाव के लिए प्रतिदिन 50 रुपये दिए जाते हैं।