Lucknow के राज्य संग्रहालय में वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान पर चर्चा, डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल की याद में आयोजित हुआ कार्यक्रम
Lucknow: राजधानी के राज्य संग्रहालय में शुक्रवार को वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान और भारतीय प्रतिमा-विज्ञान के आपसी संबंधों पर एक खास व्याख्यान हुआ। यह कार्यक्रम संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्या
Lucknow: राजधानी के राज्य संग्रहालय में शुक्रवार को वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान और भारतीय प्रतिमा-विज्ञान के आपसी संबंधों पर एक खास व्याख्यान हुआ। यह कार्यक्रम संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला का हिस्सा था। इस आयोजन के जरिए भारतीय संस्कृति और विरासत के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की गई।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की पहल पर यह व्याख्यानमाला 26 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक चलेगी। इसका मुख्य मकसद डॉ. अग्रवाल के काम को याद करना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर बातचीत को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में कई बड़े विद्वान शामिल हुए। प्रो. के.के. थपल्याल ने बताया कि डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने भारतीय कला, इतिहास और संस्कृति को देखने का एक नया नजरिया दिया। उनके शोध ने हमारी परंपराओं और लोकसंस्कृति को समझने में मदद की है। वहीं प्रो. शैलेन्द्र नाथ कपूर ने उनकी किताब ‘पाणिनिकालीन भारत’ का जिक्र करते हुए कहा कि व्याकरण जैसे ग्रंथों से भी इतिहास और संस्कृति को समझा जा सकता है।
डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि डॉ. अग्रवाल का काम छात्रों और कला प्रेमियों के लिए एक गाइड की तरह है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की पुरानी धरोहरों को सहेजना और उनकी जानकारी आम लोगों तक पहुँचाना बहुत जरूरी है। इस व्याख्यानमाला में लखनऊ विश्वविद्यालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व विभागाध्यक्षों और महानिदेशकों ने अपने विचार रखे।