Lucknow में 2000 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने वाला सिकंदर खान कौन, दो वोटर आईडी और अलग-अलग पते आए सामने
Lucknow: राजधानी लखनऊ में करीब 2000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले मास्टरमाइंड सिकंदर खान की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस और प्रशासन की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस व्यक्ति ने अलग-अल
Lucknow: राजधानी लखनऊ में करीब 2000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले मास्टरमाइंड सिकंदर खान की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस और प्रशासन की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस व्यक्ति ने अलग-अलग जगहों पर अपनी पहचान बदलने के लिए दो वोटर आईडी और एक शपथपत्र का इस्तेमाल किया। करीब 120 बीघा सरकारी जमीन को हड़पने के इस खेल में अब इराक कनेक्शन की बात भी सामने आ रही है।
जांच में पता चला है कि सिकंदर खान के पास दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड हैं। एक पहचान पत्र में उसे बलरामपुर के उतरौला (रंकीबदलपुर) का निवासी बताया गया है, जबकि दूसरे में उसे बहराइच का निवासी दिखाया गया है। वहीं, जब उसने अदालत में शपथपत्र जमा किया, तो वहां खुद को लखनऊ के इस्माईलगंज का निवासी बताया। उसने चिनहट और उत्तरधौना की जमीनों को अपनी पैतृक संपत्ति बताकर कब्जा करने की कोशिश की।
दस्तावेजों की जांच में यह भी मिला कि सभी कागजों में पिता का नाम शाहजहां खान लिखा है, लेकिन सिकंदर खान के हस्ताक्षर हर जगह अलग-अलग हैं। इस पूरे मामले की जड़ें करीब 38 साल पुरानी हैं। साल 1988 में फर्जी चकबंदी आदेश तैयार करवाकर जानकीपुरम, चिनहट और बीकेटी इलाकों में सरकारी जमीन हड़पने की साजिश रची गई थी।
साल 2020 में सिकंदर खान ने हाईकोर्ट में अपील की थी कि फर्जी आदेशों के आधार पर कुछ जमीनों को खतौनी में दर्ज किया जाए। जब अदालत को शक हुआ, तो डीएम लखनऊ से हलफनामा मांगा गया और 2021 में एक जांच समिति बनी, लेकिन वह जांच आगे नहीं बढ़ पाई। अब इस मामले में जानकीपुरम थाने में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और फर्जी आदेश बनाने के आरोप में चकबंदी विभाग के सात अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। चकबंदी आयुक्त ने कहा है कि राजस्व के नुकसान का आकलन किया जाएगा और वसूली की कार्रवाई भी हो सकती है।