UP: लखनऊ के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पांच दिनों तक चला समवशरण महामंडल विधान 16 मई, 2026 को संपन्न हो गया। आचार्य सुबल सागर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का समापन पूर्णाहुति और हवन के साथ हुआ। इस दौरान
UP: लखनऊ के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पांच दिनों तक चला समवशरण महामंडल विधान 16 मई, 2026 को संपन्न हो गया। आचार्य सुबल सागर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का समापन पूर्णाहुति और हवन के साथ हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और विश्व शांति की कामना की।
इस आयोजन में कौन-कौन शामिल रहा और क्या रहा खास
यह धार्मिक आयोजन 11 मई, 2026 को शुरू हुआ था। कार्यक्रम में अविकल-आयुषी जैन को सौधर्म इंद्र बनने का मौका मिला, जबकि मनीष जैन परिवार को चक्रवर्ती बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आदिश जैन ने इस दौरान अखंड दीपक जलाया। श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ का जन्म और मोक्ष कल्याणक मनाते हुए पंचामृत अभिषेक किया और निर्वाण लाडू चढ़ाया।
आचार्य सुबल सागर के प्रवचन और समवशरण का महत्व
आचार्य सुबल सागर ने अपने मंगल प्रवचन में लोगों को भावों के महत्व के बारे में समझाया। समापन के दिन महायज्ञ के साथ विधान पूरा हुआ और भक्तों ने भव्य समवशरण रचना पर श्रीफल अर्पित किए। जैन धर्म में समवशरण एक दिव्य प्रवचन हॉल होता है, जहां तीर्थंकर केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद सभी जीवों को धर्म का उपदेश देते हैं। यहाँ मनुष्य, देवता और पशु सभी समान रूप से उपदेश सुन सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में समवशरण महामंडल विधान कब से कब तक चला
यह पांच दिवसीय आयोजन 11 मई, 2026 को शुरू हुआ और 16 मई, 2026 को पूर्णाहुति और हवन के साथ संपन्न हुआ।
जैन धर्म में समवशरण का क्या मतलब होता है
समवशरण एक दिव्य प्रवचन हॉल है, जिसे तीर्थंकरों द्वारा केवलज्ञान के बाद बनाया जाता है, जहाँ वे सभी प्राणियों को धर्म का उपदेश देते हैं।