Lucknow के शिविरी प्लांट पहुंचे 44 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर, जाना शहर के कचरे से खाद और बिजली बनाने का तरीका
Lucknow: राजधानी लखनऊ के शिविरी में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का शनिवार को 44 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टरों ने दौरा किया। ये सभी अधिकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासनिक अकादमी में अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस दौरे का म
Lucknow: राजधानी लखनऊ के शिविरी में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का शनिवार को 44 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टरों ने दौरा किया। ये सभी अधिकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासनिक अकादमी में अपनी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नए अधिकारियों को यह समझाना था कि शहर से निकलने वाले भारी मात्रा में कूड़े-कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा कैसे किया जाता है।
लखनऊ अब उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला शहर बन गया है जिसने नगरपालिका के ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर लिया है। इसी वजह से शहर को आधिकारिक तौर पर ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ शहर का दर्जा मिला है। शिविरी प्लांट लखनऊ की तीसरी ऐसी सुविधा है जहाँ कचरे को प्रोसेस किया जाता है। लखनऊ नगर निगम और Bhumi Green Energy ने मिलकर तीन ऐसे प्लांट लगाए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन है, जबकि शहर में रोज लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है।
प्लांट की कार्यप्रणाली को समझाते हुए बताया गया कि यहाँ कचरे को दो हिस्सों में बांटा जाता है। लगभग 55% जैविक कचरे से खाद और बायोगैस बनाई जाती है, जबकि 45% अजैविक कचरे को अलग कर उसे रिसाइकिल किया जाता है या सीमेंट और कागज उद्योगों के लिए ईंधन (RDF) में बदला जाता है। शहर में घर-घर से कचरा इकट्ठा करने का काम 96.53% तक पहुंच गया है और 70% से ज्यादा लोग कचरे को शुरू में ही अलग-अलग कर रहे हैं।
नगर निगम ने पुराने कचरे के ढेर को खत्म करने के लिए भी काम किया है, जिसमें 18.5 लाख मीट्रिक टन में से 12.86 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निपटारा हो चुका है। आने वाले समय में शिविरी में 15 मेगावाट का वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) प्लांट भी लगाया जाएगा। यह प्लांट रोज 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन RDF का इस्तेमाल करके बिजली पैदा करेगा।