UP: लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में एक सर्वे किया गया है. इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अस्पताल की ओपीडी में बच्चों को दूध पिलाते समय माताओं को काफी असहजता महसूस होती है.
UP: लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में एक सर्वे किया गया है. इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अस्पताल की ओपीडी में बच्चों को दूध पिलाते समय माताओं को काफी असहजता महसूस होती है. अस्पताल प्रशासन विभाग ने इस समस्या को गहराई से समझने के लिए एक रिसर्च की थी.
अध्ययन में क्या बातें सामने आईं?
डॉ. राजेश हर्षवर्धन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में 70 स्तनपान कराने वाली माताओं से बात की गई. रिसर्च में पाया गया कि 61% महिलाओं ने ओपीडी में बच्चे को दूध पिलाते समय परेशानी महसूस की. माताओं ने बताया कि अस्पताल में उनके लिए सही जगह और निजता का अभाव है.
माताओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
सर्वे के दौरान महिलाओं ने अपनी समस्याओं को विस्तार से बताया, जो इस प्रकार हैं:
- 41% महिलाओं ने निजता (Privacy) की कमी की शिकायत की.
- 27% माताओं ने बैठने की असुविधाजनक व्यवस्था को बड़ी समस्या बताया.
- 24% महिलाओं ने कहा कि उन्हें लोगों द्वारा देखे जाने का डर रहता है.
अध्ययन के बाद क्या सुझाव दिए गए?
SGPGI के अस्पताल प्रशासन विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए ब्रेस्टफीडिंग कियोस्क यानी स्तनपान कक्ष बनाने की वकालत की है. इससे माताओं को अस्पताल के भीतर एक सुरक्षित और अलग स्थान मिल सकेगा, जहां वे बिना किसी डर या झिझक के अपने बच्चों को दूध पिला सकेंगी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
SGPGI के अध्ययन में कितने प्रतिशत माताएं असहज महसूस कर रही थीं?
डॉ. राजेश हर्षवर्धन के नेतृत्व में हुए अध्ययन में शामिल 70 माताओं में से 61% महिलाओं ने ओपीडी में बच्चे को दूध पिलाते समय असहजता महसूस की.
अस्पताल में माताओं को मुख्य रूप से क्या दिक्कतें आ रही हैं?
मुख्य चुनौतियों में निजता की कमी (41%), बैठने की खराब व्यवस्था (27%) और लोगों द्वारा देखे जाने का डर (24%) शामिल है.