UP: लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के नवीपनाह गांव में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया. यहाँ एक निर्माणाधीन मकान के पास सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की जहरीली गैस की वजह से दम घुटने से मौत हो गई. मृतकों की पहचान
UP: लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के नवीपनाह गांव में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया. यहाँ एक निर्माणाधीन मकान के पास सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की जहरीली गैस की वजह से दम घुटने से मौत हो गई. मृतकों की पहचान राजेश (30) और रिंकू (33) के रूप में हुई है, जो गांव के ही निवासी थे और अपने परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे.
हादसा कैसे हुआ और क्या रही वजह
जानकारी के मुताबिक, मयंक सिंह के निर्माणाधीन मकान के बाहर एक नया सेप्टिक टैंक बनाया गया था. यह टैंक तालाब से सटा हुआ था, जिसकी वजह से इसमें मलबा और पानी भर गया था. दोपहर करीब 2:30 बजे राजेश बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक के अंदर उतरे. जब वह बाहर नहीं आए, तो रिंकू उन्हें बचाने के लिए अंदर गए और वह भी बेहोश हो गए. दोनों की मौत जहरीली गैस के प्रभाव से हुई है.
प्रशासन की देरी और ग्रामीणों का गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को खबर दी, लेकिन दमकल और NDRF की टीमें दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचीं. इससे नाराज ग्रामीणों ने खुद फावड़े और बेल्चे से टैंक की दीवार तोड़कर दोनों शवों को बाहर निकाला. शाम 5 बजे के करीब शव बाहर आ सके. एसडीएम अंकित मौर्या और थाना प्रभारी मो. रोशन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
सरकारी मदद और कानूनी कार्रवाई
एसडीएम अंकित मौर्या ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सरकारी मदद देने का भरोसा दिया है. थाना प्रभारी मो. रोशन ने बताया कि अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ होगी और उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि नियमों के मुताबिक सेप्टिक टैंक की मैनुअल सफाई प्रतिबंधित है और इसके लिए मशीनों का उपयोग अनिवार्य है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
मृतकों की पहचान क्या है और वे कहाँ के रहने वाले थे?
मृतकों के नाम राजेश (30 वर्ष) और रिंकू (33 वर्ष) हैं. दोनों लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के नवीपनाह गांव के ही निवासी थे.
हादसे के समय बचाव कार्य में क्या समस्या आई?
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस को सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड और NDRF की टीमें दो घंटे तक नहीं पहुंचीं, जिसके कारण ग्रामीणों को खुद दीवार तोड़कर शव निकालने पड़े.