UP: लखनऊ में महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट सेफ राइड’ कागजों तक ही सिमट गया है। शहर में ऑटो ड्राइवरों द्वारा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और रेप की कोशिश के मामले सामने आए हैं, जिससे इस योजना क
UP: लखनऊ में महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट सेफ राइड’ कागजों तक ही सिमट गया है। शहर में ऑटो ड्राइवरों द्वारा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और रेप की कोशिश के मामले सामने आए हैं, जिससे इस योजना की पोल खुल गई है। गोमती नगर और सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रोजेक्ट सेफ राइड क्या है और क्यों है नाकाम
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट और RTO ने 1 अगस्त 2025 को यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद ऑटो और ई-रिक्शा ड्राइवरों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना और उनकी गाड़ियों पर QR कोड लगाना था, ताकि यात्री ड्राइवर की जानकारी निकाल सकें। लेकिन 50 से 60 हजार ई-रिक्शा में से दिसंबर 2025 तक केवल 15 हजार के करीब रजिस्ट्रेशन हुए। साथ ही, ड्राइवरों का कैरेक्टर वेरिफिकेशन भी बाद में वैकल्पिक कर दिया गया, जिससे सुरक्षा में बड़ी चूक हुई।
हाल ही में हुई बड़ी वारदातें और पुलिस की कार्रवाई
6 जून 2026 को गोमती नगर में एक बिजनेसमैन की पत्नी के साथ ऑटो ड्राइवर ने छेड़छाड़ की और गला दबाने की कोशिश की। वहीं 8 जून को सिपाही भर्ती परीक्षा देने जा रही दो महिलाओं के साथ एक ऑटो ड्राइवर ने रेप की कोशिश की। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद आरोपी हासिम को गिरफ्तार किया, जिसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी मिला है। DCP (West) कमलेश दीक्षित ने बताया कि FIR दर्ज कर आरोपियों को पकड़ा गया है।
योजना में क्या रहीं मुख्य कमियां
- रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन कई बार बढ़ाई गई लेकिन रिस्पॉन्स बहुत कम रहा।
- ई-रिक्शा यूनाइटेड फ्रंट जैसे यूनियनों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया।
- ड्राइवरों की पुलिस जांच (Character Verification) को अनिवार्य नहीं रखा गया।
- सड़कों पर चेकिंग और चालान की सख्ती कम रही।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रोजेक्ट सेफ राइड का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य ऑटो और ई-रिक्शा ड्राइवरों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और QR कोड टैगिंग करना था, जिससे यात्री ड्राइवर और वाहन की जानकारी प्राप्त कर सकें और सफर सुरक्षित हो।
रजिस्ट्रेशन की स्थिति क्या रही?
शहर में करीब 50-60 हजार ई-रिक्शा थे, लेकिन दिसंबर 2025 तक केवल 15,000 के आसपास ड्राइवरों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया था।