UP : लखनऊ के ऐतिहासिक रूमी गेट के पास लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा बनाई जा रही पार्किंग और ‘लज़ीज़ गली’ परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिया समुदाय के उलेमाओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस नि
UP : लखनऊ के ऐतिहासिक रूमी गेट के पास लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा बनाई जा रही पार्किंग और ‘लज़ीज़ गली’ परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिया समुदाय के उलेमाओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस निर्माण से इलाके की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा। इस मुद्दे को लेकर छोटे इमामबाड़े में बैठक हुई और प्रशासन को चेतावनी दी गई है।
क्यों हो रहा है रूमी गेट के पास विरोध
शिया समुदाय का कहना है कि ‘लज़ीज़ गली’ बनने से पास के धार्मिक इमामबाड़ों के करीब ऐसी गतिविधियां होंगी जिनसे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। मौलाना कल्बे जवाद के नेतृत्व में हुई बैठक में कहा गया कि उन्होंने कई बार LDA से बातचीत की लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। मौलाना सैफ अब्बास ने इस संबंध में उपमुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी।
क्या है LDA की योजना और प्रोजेक्ट की लागत
LDA ने हुसैनाबाद इलाके में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए 3 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ी पार्किंग बनाने का फैसला किया था। इसके लिए रूमी गेट के पास लगभग 9000 वर्ग मीटर जमीन चुनी गई है। इस पार्किंग में 15 बसें, 150 कारें और 300 दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके साथ ही 15 फूड कियोस्क वाली ‘लज़ीज़ गली’ और शौचालय ब्लॉक का काम भी किया जा रहा है।
आगे क्या होगा और कब है उद्घाटन
बताया जा रहा है कि ‘लज़ीज़ गली’ का उद्घाटन 30 मई को होना है। इससे पहले शिया उलेमा बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर सकते हैं। तय किया गया है कि आगामी जुमे की नमाज के बाद उलेमा इस स्थल का दौरा करेंगे और चल रहे काम को रोकने की कोशिश करेंगे। बैठक में मौलाना मीसम जैदी, मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी और मौलाना फरीदुल हसन समेत कई प्रमुख उलेमा शामिल थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रूमी गेट के पास पार्किंग और लज़ीज़ गली का बजट और क्षमता क्या है
इस परियोजना की कुल लागत 3 करोड़ रुपये है। पार्किंग में 15 बसें, 150 चार-पहिया और 300 दो-पहिया वाहनों के खड़े होने की जगह होगी और इसमें 15 फूड कियोस्क भी शामिल होंगे।
शिया समुदाय इस निर्माण का विरोध क्यों कर रहा है
समुदाय का मानना है कि इस निर्माण से इलाके की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान प्रभावित होगी और इमामबाड़ों के पास ऐसी गतिविधियां होंगी जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।