UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में राजा कंस के किले और एक मस्जिद को लेकर विवाद गहरा गया है। 22 मई 2026 को पुलिस की भारी तैनाती के बीच विवादित स्थल पर नमाज अदा की गई, जबकि पासी समाज के नेता सूरज पासी और उनके 20 साथियों को वि
UP : लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में राजा कंस के किले और एक मस्जिद को लेकर विवाद गहरा गया है। 22 मई 2026 को पुलिस की भारी तैनाती के बीच विवादित स्थल पर नमाज अदा की गई, जबकि पासी समाज के नेता सूरज पासी और उनके 20 साथियों को विरोध रोकने के लिए घर में नजरबंद कर दिया गया। लखन आर्मी पासी समाज ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सड़कों पर उतरेंगे।
क्या है राजा कंस किले और मस्जिद का विवाद
यह पूरा मामला कांसमंडी क्षेत्र की एक मस्जिद और कब्रिस्तान से जुड़ा है। पासी समाज का दावा है कि यह जगह असल में महाराजा कंस का किला और एक प्राचीन शिव मंदिर है। दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय का कहना है कि सरकारी कागजों में यह स्थल एक मस्जिद और मकबरे के रूप में दर्ज है। पासी समाज का आरोप है कि यहाँ अवैध कब्जे किए गए हैं और नई कब्रें बनाई जा रही हैं।
इतिहास और सरकारी दस्तावेजों में क्या दर्ज है
स्थानीय परंपराओं और अंग्रेजी गजेटियर के अनुसार, 11वीं शताब्दी में राजा कंस काकोरी और आसपास के इलाकों में काफी प्रभावशाली थे। उन्हें विदेशी आक्रमणकारियों का मुकाबला करने वाले योद्धा के रूप में जाना जाता है। गजेटियर में यह भी लिखा है कि राजा कंस ने सालार मसूद के दो सेनापतियों, सैय्यद हातिम और खातिम को मार गिराया था। पासी समाज के नेता सूरज पासवान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस स्थल को सरकारी संरक्षण में लेने की मांग की है।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या किया
तनाव को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने विवादित स्थल के आसपास बैरिकेडिंग कर दी है और आम लोगों के जाने पर रोक लगा दी है। 22 मई को नमाज के दौरान किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। अल्पसंख्यक समाज के मौलाना सूफियान ने इसे मस्जिदों को मंदिर बनाने का एक ट्रेंड बताया है, जबकि प्रशासन का मुख्य फोकस फिलहाल शांति बनाए रखने पर है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पासी समाज की मुख्य मांग क्या है?
पासी समाज और लखन आर्मी की मांग है कि विवादित स्थल को राजा कंस के किले और शिव मंदिर के रूप में मान्यता दी जाए, इसे सरकारी संरक्षण मिले और अवैध निर्माणों को हटाया जाए।
प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
प्रशासन ने 22 मई को पासी समाज के नेता सूरज पासी और करीब 20 कार्यकर्ताओं को घर में नजरबंद किया और विवादित स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया।