Lucknow में साइबर अपराधियों को छोड़ने के आरोप में 3 पुलिसकर्मी निलंबित, 6 लाइन हाजिर

Lucknow: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में साइबर अपराधियों को पकड़ने और फिर उन्हें छोड़ने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही और मिलीभगत की बात सामने आने के बाद विभाग ने सख्त एक्शन लिया है। अब तक तीन सिप

Lucknow: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में साइबर अपराधियों को पकड़ने और फिर उन्हें छोड़ने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही और मिलीभगत की बात सामने आने के बाद विभाग ने सख्त एक्शन लिया है। अब तक तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है और छह अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।

पूरा मामला समिट बिल्डिंग में 30 जून और 1 जुलाई 2026 को हुई छापेमारी से जुड़ा है। पुलिस ने उस समय 119 लोगों को गिरफ्तार दिखाया था, लेकिन आरोप है कि तीन साइबर अपराधियों को मौके से ही छोड़ दिया गया। इस घटना की जानकारी तब मिली जब हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने पैसे लेकर आरोपियों को छोड़ा। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने मामले की जांच तेज की और पुलिसकर्मियों की कारस्तानी उजागर हुई।

पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल यादव ने इस मामले में कार्रवाई की है। निलंबित किए गए सिपाहियों में वसीम, जितेंद्र और श्रीकांत शामिल हैं। वहीं दो दारोगाओं समेत छह अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने साफ किया है कि अपराधियों का साथ देने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरे मामले की जांच एसीपी गोमतीनगर रत्नेश सिंह को सौंपी गई थी।

जानकारी के मुताबिक, समिट बिल्डिंग में एक कॉल सेंटर चल रहा था जहां से अमेरिकी नागरिकों के साथ ठगी की जा रही थी। इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड विनीत शर्मा, उसकी प्रेमिका रिंकी दास गुप्ता और पार्टनर जयराज नायकर को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इनके निवेश और संपत्तियों की जांच कर रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी निलंबित और लाइन हाजिर पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और संदिग्ध पाए जाने वाले अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होगी।