UP: लखनऊ में बुधवार, 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी का पर्व पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। शहर के तमाम मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान क
UP: लखनऊ में बुधवार, 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी का पर्व पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। शहर के तमाम मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। इस बार की एकादशी इसलिए खास थी क्योंकि यह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आई है, जो हर तीन साल में एक बार होता है।
Padmini Ekadashi का महत्व और मान्यता क्या है
इस एकादशी को कमला एकादशी भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक प्रगति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा था, जिसके बाद उन्हें पुत्र कार्तवीर्य का आशीर्वाद मिला। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे शुभ संयोग भी बने, जिससे व्रत का फल और बढ़ गया।
पूजा की विधि और व्रत के नियम क्या रहे
भक्तों ने ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान किया और व्रत का संकल्प लिया। पूजा में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित किए गए। नियमों के मुताबिक, एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी को ही सात्विक भोजन करना जरूरी होता है और लहसुन-प्याज का परहेज किया जाता है। एकादशी के दिन लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला, जलाहार या फलाहार व्रत रखा और रात भर जागरण कर विष्णु मंत्रों का जाप किया।
पारणा का समय और तरीका क्या है
पद्मिनी एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि को खोला जाता है। 28 मई 2026 को पारणा का समय सुबह 05:25 से 07:56 तक रहेगा। व्रत खोलने से पहले स्नान और पूजा करना जरूरी है। इसके बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान देने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पद्मिनी एकादशी 2026 में पारणा का समय क्या है
पद्मिनी एकादशी का पारणा 28 मई 2026 को सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे के बीच किया जाएगा।
यह एकादशी इतनी खास क्यों मानी जा रही है
यह एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आई है, इसलिए यह हर तीन साल में एक बार आती है। साथ ही इस बार सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का भी संयोग बना है।