UP: लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ कन्वेंशन सेंटर के पास सड़क किनारे एक गत्ते के डिब्बे में 7 दिन की नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। आधी रात को जब वहां से गुजर र
UP: लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ कन्वेंशन सेंटर के पास सड़क किनारे एक गत्ते के डिब्बे में 7 दिन की नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। आधी रात को जब वहां से गुजर रहे लोगों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी, तब उसे डिब्बे से बाहर निकाला गया। बच्ची को कॉटन के बीच रखा गया था और उसे छोड़कर अज्ञात व्यक्ति फरार हो गया।
बच्ची को कैसे बचाया गया और अब क्या स्थिति है?
घटना गुरुवार, 12 जून 2026 की है। कन्वेंशन सेंटर के पास गत्ते के डिब्बे से रोने की आवाज आने पर स्थानीय लोगों ने बच्ची को देखा। बच्ची लगभग 7 दिन की थी जिसे कॉटन में लपेटकर छोड़ा गया था। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है कि बच्ची को वहां किसने छोड़ा।
लावारिस बच्चों के लिए क्या होती है सरकारी प्रक्रिया?
नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में पुलिस सबसे पहले Child Line (1098) की टीम को खबर करती है। इसके बाद बच्ची का मेडिकल टेस्ट कराया जाता है और उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाता है। मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद बच्ची को राजकीय बाल गृह या लीलावती दत्तक ग्रहण इकाई जैसे केंद्रों में भेजा जाता है। CWC तीन महीने तक माता-पिता का इंतजार करती है, उसके बाद गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होती है।
गोद लेने की प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
बाल कल्याण विकास अधिकारी डॉ. संगीता शर्मा के अनुसार, किसी भी बच्चे को गोद लेने की पूरी कानूनी प्रक्रिया में करीब डेढ़ से दो साल का समय लगता है। इस दौरान बच्चे की पूरी देखभाल और परवरिश दत्तक ग्रहण केंद्र में ही की जाती है। लखनऊ के केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक, यहां मिलने वाले हर तीसरे बच्चे के लड़की होने की बात सामने आई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लावारिस मिलने वाले बच्चों को कहाँ रखा जाता है?
लखनऊ में ऐसे बच्चों को राजकीय बाल गृह शिशु या लीलावती दत्तक ग्रहण इकाई जैसे सरकारी केंद्रों में रखा जाता है, जहाँ उनकी देखभाल होती है।
बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया कब शुरू होती है?
बाल कल्याण समिति (CWC) पहले तीन महीने तक बच्चे के माता-पिता का इंतजार करती है, उसके बाद ही कानूनी रूप से गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।