UP: लखनऊ के CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) में सोमवार, 11 मई 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों पर बात हुई। इसका मुख्
UP: लखनऊ के CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) में सोमवार, 11 मई 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों पर बात हुई। इसका मुख्य मकसद ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना है जिससे आम किसानों को फायदा हो और फसल की पैदावार बढ़े।
खेती में कौन सी नई तकनीकें आएंगी काम
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आश्विन काशिकर ने बताया कि जीनोमिक चयन, स्पीड ब्रीडिंग और AI जैसी तकनीकों से फसलों में सुधार लाया जा रहा है। CRISPR-Cas जैसी जीन एडिटिंग तकनीक से फसलों की पोषण क्षमता और बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ाई जाएगी। साथ ही, NBRI द्वारा तैयार किए गए गुलाबी सुंडी प्रतिरोधी GM कपास का परीक्षण भी किया जा रहा है, जो कीटों से फसल को बचाने में मददगार होगा।
किसानों की कमाई और पैदावार पर क्या असर होगा
संस्थान की बायोइनोक्युलेंट टेक्नोलॉजी से फसलों की पैदावार 10 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इससे किसानों की आमदनी में 15 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से रासायनिक खादों के खर्च में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आएगी, जिससे खेती की लागत घटेगी।
CM योगी और केंद्र सरकार का विजन क्या है
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से अपील की कि वे तकनीक और नवाचार को अपनाएं ताकि उत्तर प्रदेश देश की ‘डीप टेक कैपिटल’ बन सके। उन्होंने बताया कि अब तकनीक लैब से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंच रही है। वहीं, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2014 के 400 स्टार्टअप्स से बढ़कर अब दो लाख से ज्यादा हो गया है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
NBRI की बायोइनोक्युलेंट टेक्नोलॉजी किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है
यह तकनीक फसल की पैदावार को 10-30% तक बढ़ाती है और रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को 40-50% तक कम करती है, जिससे किसानों की आय में 15-30% की बढ़ोतरी हो सकती है।
कृषि क्षेत्र में किन नई तकनीकों पर चर्चा हुई
कार्यक्रम में जीनोमिक चयन, स्पीड ब्रीडिंग, AI-आधारित फीनोटाइपिंग और CRISPR-Cas आधारित जीन संपादन जैसी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा हुई ताकि फसल सुधार को गति मिले।