UP : लखनऊ नगर निगम के मौजूदा सदन को तीन साल पूरे होने पर शहरवासियों को बड़ी सौगात मिलने वाली है। 26 मई 2026 को एक भव्य समारोह होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर 100 करोड
UP : लखनऊ नगर निगम के मौजूदा सदन को तीन साल पूरे होने पर शहरवासियों को बड़ी सौगात मिलने वाली है। 26 मई 2026 को एक भव्य समारोह होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया जाएगा, जिससे शहर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।
समारोह में क्या होगा खास और कौन होंगे शामिल
इस कार्यक्रम के दौरान लखनऊ नगर निगम अपने पिछले तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगा। इसमें बताया जाएगा कि शहर के विकास के लिए अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत करेंगे और पूरे हुए कामों का उद्घाटन करेंगे। नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की इसमें मौजूदगी रहेगी।
महापौर की शक्तियां बहाल, तैयारियों की समीक्षा शुरू
इस समारोह से ठीक पहले लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां बहाल कर दी गई हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने में हुई देरी के कारण इन शक्तियों पर रोक लगाई थी, जिसे अब हटा लिया गया है। शक्तियां वापस मिलते ही महापौर ने अधिकारियों के साथ बैठक की और 26 मई के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया।
शपथ विवाद और नगर निगम का बजट
महापौर सुषमा खर्कवाल ने पार्षद ललित तिवारी को शपथ दिलाने में देरी का कारण मुंबई दौरा और अचानक तबीयत खराब होना बताया। वहीं, पार्षद ललित तिवारी ने अपनी शपथ को न्याय की जीत बताया है। गौरतलब है कि नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1534 करोड़ रुपये का बजट पास किया है, जिससे शहर में विकास कार्यों को गति मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में 26 मई को क्या होने वाला है?
26 मई 2026 को लखनऊ नगर निगम के तीन साल पूरे होने पर भव्य समारोह होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
महापौर सुषमा खर्कवाल की शक्तियां क्यों रुकी थीं?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाने में देरी होने के कारण महापौर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी थी, जिसे अब बहाल कर दिया गया है।