Lucknow में जमीन रजिस्ट्री में बड़ी धोखाधड़ी, मोहनलालगंज में स्टाम्प चोरी से सरकार को 4.27 करोड़ का नुकसान

Lucknow: लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टाम्प शुल्क की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ आवासीय और व्यावसायिक जमीनों को कागजों में कृषि भूमि दिखाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगा

Lucknow: लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टाम्प शुल्क की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ आवासीय और व्यावसायिक जमीनों को कागजों में कृषि भूमि दिखाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया। अप्रैल और मई 2026 की जांच में यह खुलासा हुआ कि अकेले मोहनलालगंज में 50 से ज्यादा मामलों में करीब 4.27 करोड़ रुपये के राजस्व की चोरी हुई है।

जांच के दौरान पाया गया कि सीजी सिटी से लेकर गोसाईंगंज तक के इलाकों में धारा-143 के तहत जमीन का उपयोग पहले ही कृषि से आवासीय में बदला जा चुका था, लेकिन रजिस्ट्री कराते समय इसे फिर से कृषि भूमि ही दिखाया गया। प्रशासन ने संदेह के आधार पर 125 बैनामों की बारीकी से जांच की, जिसमें 50 से अधिक मामलों में चोरी की पुष्टि हुई। अब इन खरीदारों को नोटिस भेजकर मामले दर्ज किए गए हैं।

यह गड़बड़ी सिर्फ एक तहसील तक सीमित नहीं है। पूरे लखनऊ जिले की पांचों तहसीलों में हुई जांच में कुल 158 मामलों में 7.51 करोड़ रुपये की स्टाम्प चोरी पकड़ी गई है। मोहनलालगंज के बाद बीकेटी तहसील दूसरे नंबर पर रही, जहाँ 35 मामलों में 72 लाख रुपये की चोरी हुई। इसके अलावा सरोजनीनगर, सदर और मलिहाबाद तहसीलों में भी ऐसी अनियमितताएं मिली हैं। इन 158 मामलों में से 154 के खिलाफ अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अदालत में वाद दर्ज कर नोटिस जारी किए गए हैं।

तहसील/क्षेत्र मामलों की संख्या राजस्व नुकसान (लगभग)
मोहनलालगंज 50+ 4.27 करोड़ रुपये
बीकेटी (BKT) 35 72 लाख रुपये
कुल लखनऊ जिला 158 7.51 करोड़ रुपये

महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने पूरे प्रदेश में स्टाम्प चोरी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, जो 5 जून 2026 तक चला। इस अभियान में ई-स्टाम्प के दुरुपयोग और कम शुल्क जमा करने वाले दस्तावेजों की गहन जांच की गई। भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 47ए (3) के तहत कलेक्टर को यह अधिकार है कि वह पंजीकरण के चार साल के भीतर किसी भी दस्तावेज की जांच कर सके यदि बाजार मूल्य सही नहीं दिखाया गया हो।

मोहनलालगंज तहसील में धोखाधड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। फरवरी 2026 में यहाँ एक मृत किसान को कागजों पर जिंदा दिखाकर उसकी जमीन बेचने का मामला सामने आया था। वहीं जून 2026 में फर्जी बैनामा करने के आरोप में 3 प्रॉपर्टी डीलरों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले सितंबर 2024 में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों की 27 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने का बड़ा फर्जीवाड़ा भी पकड़ा गया था।