Lucknow में बच्चों से जर्जर छत पर साफ कराई काई, हेडमास्टर और टीचर सस्पेंड
Lucknow/Mohanlalganj: राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके के ललूमर गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को खतरे में डालने का मामला सामने आया है। बारिश के बीच बच्चों से स्कूल की जर्जर छत पर चढ़कर काई साफ कराई गई, ज
Lucknow/Mohanlalganj: राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके के ललूमर गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को खतरे में डालने का मामला सामने आया है। बारिश के बीच बच्चों से स्कूल की जर्जर छत पर चढ़कर काई साफ कराई गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। इस गंभीर लापरवाही के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए हेडमास्टर और एक टीचर को निलंबित कर दिया है।
यह पूरी घटना शुक्रवार 7 अगस्त और शनिवार 8 अगस्त के बीच चर्चा में आई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विपिन कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हेडमास्टर श्वेता त्रिपाठी और सहायक शिक्षिका शगुफ्ता रानी को तुरंत सस्पेंड कर दिया। इन दोनों की तैनाती प्राथमिक विद्यालय रानीखेड़ा देवती में थी। BSA ने सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी (ABSA) को इस पूरे मामले की जांच सौंपी है और जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि जिस छत पर बच्चों को चढ़ाया गया वह काफी जर्जर थी और उसके ऊपर से हाई-टेंशन बिजली की तारें भी गुजर रही थीं। बारिश के कारण छत पर फिसलन थी, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की आलोचना की और कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, निलंबित हेडमास्टर श्वेता त्रिपाठी ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका दावा है कि यह स्कूल के रसोइए की साजिश है। उन्होंने कहा कि स्कूल में मरम्मत का काम चल रहा था और लंच ब्रेक के दौरान मरम्मत करने वाले व्यक्ति का बच्चा, जो उसी स्कूल में पढ़ता है, खुद छत पर गया था। हालांकि, यह भी आरोप लगे हैं कि वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षकों ने वीडियो बनाने वाले के परिवार को धमकाया और बच्चों के नाम स्कूल से काटने की धमकी दी।
इससे पहले ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) सुशील कुमार को भी हेडमिस्ट्रेस की अनुपस्थिति और स्कूल के रखरखाव के लिए मिले फंड का सही इस्तेमाल न करने की शिकायतें मिली थीं। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर बच्चों को इस तरह खतरनाक काम के लिए क्यों मजबूर किया गया।