UP : लखनऊ में साइबर अपराधियों ने आम लोगों और पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में कई मोबाइल हैक हुए और बैंक खातों से लाखों रुपये निकाल लिए गए। ताजा मामले में एक युवक के खाते से 1 लाख रुपये
UP : लखनऊ में साइबर अपराधियों ने आम लोगों और पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में कई मोबाइल हैक हुए और बैंक खातों से लाखों रुपये निकाल लिए गए। ताजा मामले में एक युवक के खाते से 1 लाख रुपये से ज्यादा चोरी हुए हैं, जिसकी FIR दर्ज कर साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
लखनऊ में साइबर ठगी के हालिया मामले क्या हैं?
शहर में ठगी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। अर्जुनगंज के ज्ञानेंद्र कुमार राय का मोबाइल एक लिंक पर क्लिक करने से हैक हुआ, जिससे उनके HDFC बैंक खातों से 10 लाख रुपये निकल गए। वहीं, गौतमपल्ली के राऊफूल हसन के खाते से 98 हजार रुपये उड़ा लिए गए। बीकेटी महिला थाने में तैनात एक महिला दरोगा का फोन ऑटो-अपडेट के दौरान फॉर्मेट हो गया, जिसके बाद उनके खाते से 1.64 लाख रुपये गायब हो गए।
कैसे काम करता है यह साइबर गिरोह और पुलिस की कार्रवाई?
पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों से मोबाइल चोरी कर UPI के जरिए पैसे निकालता था। इस गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार हुए हैं, जो औरैया, शाहजहांपुर, हाथरस और हरदोई के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके पास से 15 चोरी के मोबाइल, 7 सिम कार्ड और एक हुंडई वर्ना कार बरामद की है। एक शिकायतकर्ता सरोज कुमार के SBI और PNB खातों से कुल 1.90 लाख रुपये निकाले गए थे।
साइबर सेल ने लोगों की मदद के लिए क्या किया है?
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल ने CEIR पोर्टल के जरिए 65 खोए हुए मोबाइल बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए हैं, जिनकी कीमत करीब 15 लाख रुपये है। साइबर थाने के इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने ठगी के शिकार हुए लोगों की रकम फ्रीज कराने की कोशिश की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बैंकिंग ऐप्स पर पासवर्ड और ऐप लॉक लगाकर रखें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत तुरंत 24 घंटे के भीतर साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज करानी चाहिए।
मोबाइल चोरी होने पर उसे कैसे ट्रैक या ब्लॉक करें?
मोबाइल चोरी होने पर नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं और सरकारी CEIR पोर्टल का उपयोग कर फोन को ब्लॉक या ट्रैक करें।