UP : लखनऊ के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब पुराने लखनऊ की तंग गलियों और भारी जाम से छुटकारा मिलेगा। शहर में मेट्रो का नया फेज 1B शुरू होने जा रहा है, जो चारबाग को वसंत कुंज से जोड़ेगा। इस नए कॉरिडोर के बनने से चारब
UP : लखनऊ के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब पुराने लखनऊ की तंग गलियों और भारी जाम से छुटकारा मिलेगा। शहर में मेट्रो का नया फेज 1B शुरू होने जा रहा है, जो चारबाग को वसंत कुंज से जोड़ेगा। इस नए कॉरिडोर के बनने से चारबाग रेलवे स्टेशन दिल्ली के राजीव चौक की तरह एक बड़ा इंटरचेंज हब बन जाएगा, जहाँ से यात्री आसानी से अलग-अलग रूट पर जा सकेंगे।
नया मेट्रो रूट और स्टेशन की जानकारी
यह नया कॉरिडोर लगभग 11.165 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से 7 स्टेशन जमीन के नीचे (underground) होंगे और 5 स्टेशन ऊपर (elevated) बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद अमीनाबाद, Yahiyaganj, पांडेयगंज और चौक जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों को जोड़ना है। साथ ही KGMU जैसे बड़े अस्पताल तक पहुँचना भी आसान हो जाएगा।
प्रोजेक्ट की लागत और समय सीमा
इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 5,801 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यूपी कैबिनेट ने 19 मई 2026 को इसके लिए जरूरी MoU को मंजूरी दे दी है, जिससे अब New Development Bank से कम ब्याज पर लोन लिया जा सकेगा। निर्माण कार्य फरवरी या मार्च 2026 से शुरू होने की उम्मीद है और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आम जनता पर क्या होगा असर
इस नए रूट के चालू होने से शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों का समय बचेगा। UPMRC के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के बाद मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 90,000 से बढ़कर 2.5 लाख प्रतिदिन तक पहुँच सकती है। पुराने शहर की विरासत और इमारतों को बचाने के लिए Tunnel Boring Machines (TBM) का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि निर्माण के दौरान कम से कम परेशानी हो।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ मेट्रो का नया फेज 1B कहाँ से कहाँ तक जाएगा?
यह नया कॉरिडोर चारबाग से शुरू होकर KGMU के रास्ते वसंत कुंज तक जाएगा, जिसकी कुल लंबाई 11.165 किलोमीटर होगी।
इस प्रोजेक्ट में कितने स्टेशन होंगे और कितने अंडरग्राउंड होंगे?
कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से 7 स्टेशन अंडरग्राउंड और 5 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।
मेट्रो का यह नया रूट कब तक बनकर तैयार होगा?
निर्माण कार्य 2026 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है और इसे साल 2030 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है।