Lucknow को तोहफ़ा, 4 महीने में सभी 21 मेट्रो स्टेशनों से सीधे जुड़ेंगे शहर के इलाके, लास्ट माइल कनेक्टिविटी का मास्टरप्लान तैयार
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मेट्रो से सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मेट्रो प्रशासन ने शहर के सभी इलाकों को 21 मेट्रो स्टेशनों से सीधे जोड़ने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के मु
Lucknow: राजधानी लखनऊ में मेट्रो से सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मेट्रो प्रशासन ने शहर के सभी इलाकों को 21 मेट्रो स्टेशनों से सीधे जोड़ने के लिए एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक, अगले 4 महीनों के भीतर इस कनेक्टिविटी को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि लोगों को स्टेशन से अपने घर या ऑफिस तक पहुंचने में आसानी हो।
इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मेट्रो प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के दौरान इस बात पर जोर दिया था कि मेट्रो सेवाओं को सिटी बसों, ई-रिक्शा, टैक्सियों और ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए फीडर रूट और पार्किंग की सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।
मेट्रो के सफर को और आसान बनाने के लिए UPMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर सुशील कुमार ने ‘वन नेशन, वन कार्ड’ के तहत नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) की शुरुआत की है। इस कार्ड के जरिए यात्री अलग-अलग मेट्रो सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे और लखनऊ मेट्रो की यात्रा पर उन्हें 10 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी।
कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मेट्रो प्रशासन कई स्तरों पर काम कर रहा है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- चारबाग रेलवे स्टेशन से वसंत कुंज तक 11.165 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज 1B) का काम जुलाई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
- राष्ट्र प्रेरणा स्थल (बसंत कुंज) तक मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का प्रस्ताव रिव्यू किया जा रहा है।
- लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए Uber और Rapido के साथ साझेदारी की गई है।
- नए स्टेशनों पर ई-साइकिल और ई-बाइक की सुविधा के साथ समर्पित पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
- भविष्य के लिए CMP-2025 के तहत 12 मेट्रो कॉरिडोर का नेटवर्क तैयार किया गया है जो 2040-50 तक शहर के विकास को दिशा देगा।
UPMRC का बड़ा विजन है कि 2047 तक पूरे उत्तर प्रदेश में 1,575 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क हो, जिसमें अकेले लखनऊ के लिए 225 किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहर के रिहायशी इलाकों, अस्पतालों और औद्योगिक क्षेत्रों को मेट्रो से जोड़ना आसान हो जाएगा।