Lucknow में मानसून की मार से आम की पैदावार 25% घटी, बागवानों ने बताया 50 साल का सबसे बड़ा नुकसान

Lucknow: राजधानी लखनऊ के आम बागवानों के लिए यह साल काफी मुश्किल रहा है। बेमौसम बारिश और मानसून के बदलते मिजाज की वजह से इस बार आम की पैदावार में भारी गिरावट आई है। कारोबारियों और किसानों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी के आ

Lucknow: राजधानी लखनऊ के आम बागवानों के लिए यह साल काफी मुश्किल रहा है। बेमौसम बारिश और मानसून के बदलते मिजाज की वजह से इस बार आम की पैदावार में भारी गिरावट आई है। कारोबारियों और किसानों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी के आमों का उत्पादन सामान्य सालों के मुकाबले सिर्फ 25 प्रतिशत ही रहा है। बागवानों के मुताबिक ऐसा बड़ा नुकसान उन्होंने पिछले 50 सालों में नहीं देखा है।

मौसम के इस बदलाव का असर न सिर्फ उत्पादन पर बल्कि फलों की क्वालिटी पर भी पड़ा है। ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) के वैज्ञानिकों ने बताया कि मार्च के बीच में तापमान में जो उतार-चढ़ाव आया, उसकी वजह से फ्रूट सेटिंग की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके साथ ही मौसम बिगड़ने से पाउडरी मिल्ड्यू, खर्रा और एन्थ्रेक्नोज जैसे रोग बढ़ गए और भुनगा व फल मक्खी जैसे कीटों ने फसल को काफी नुकसान पहुँचाया। औद्यानिक विशेषज्ञ कृष्ण मोहन चौधरी ने भी माना कि मौसम बदलने से कीट-रोगों को पनपने का मौका मिला।

कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव ने इस साल फसल में 40 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया था। वहीं अवध आम उत्पादक बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस बार 90 प्रतिशत बौर तो आया था, लेकिन फ्रूटिंग कम होने से पैदावार घट गई। कम उत्पादन का असर कीमतों पर भी दिखा है, जहाँ जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के बाजार में ‘अंबिका’ आम 800 रुपये प्रति किलो तक बिकता नजर आया।

दूसरी तरफ, जिला कृषि अधिकारी तेगबहादुर सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम आधारित बीमा योजना के तहत टोल-फ्री नंबर 14447 पर अपने नुकसान की शिकायत दर्ज कराएं। हाल ही में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और ब्रांडिंग व जीआई टैगिंग पर जोर दिया है। उद्यान राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन में पहले स्थान पर है, जहाँ करीब 3.27 लाख हेक्टेयर में 62 लाख टन आम पैदा होता है।