UP: लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में महाराजा कंस पासी के किले को लेकर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया है। इस स्थल पर पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच मालिकाना हक को लेकर बहस चल रही है, जिससे मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। तनाव
UP: लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में महाराजा कंस पासी के किले को लेकर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया है। इस स्थल पर पासी समाज और मुस्लिम समुदाय के बीच मालिकाना हक को लेकर बहस चल रही है, जिससे मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया है ताकि शांति बनी रहे।
कौन थे महाराजा कंस पासी और क्या है उनका इतिहास
महाराजा कंस पासी अवध क्षेत्र के एक शक्तिशाली राजपासी राजा थे। माना जाता है कि उन्होंने साल 980 से 1031 ईस्वी तक शासन किया था। उनका साम्राज्य लखनऊ के मलिहाबाद और काकोरी से लेकर उन्नाव, संडीला और हरदोई तक फैला था। लखनऊ गजेटियर के रिकॉर्ड में भी 11वीं शताब्दी के अंत में राजा कंस के शासन का जिक्र है, जिन्होंने सालार मसूद गाजी के हमले का मुकाबला किया था।
किले को लेकर दोनों पक्षों के दावे क्या हैं
पासी समाज का कहना है कि यह जगह महाराजा कंस का किला थी और यहाँ शिव मंदिर में पूजा होती थी, जिस पर अब अवैध कब्जा कर लिया गया है। पासी नेता सूरज पासवान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर किले को फिर से जीवित करने की मांग की है। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मौलाना सूफियान का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में यह जगह मस्जिद और मकबरा के रूप में दर्ज है। उनका तर्क है कि सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर यह स्थल एक कब्रिस्तान और मस्जिद है।
मौजूदा स्थिति और प्रशासन की कार्रवाई
21 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद अब काफी गहरा गया है। पासी समाज इसे अपनी आस्था से जुड़ा मामला बता रहा है, जबकि अल्पसंख्यक समाज इसे सरकारी कागजों के आधार पर अपना बता रहा है। किसी भी तरह की हिंसक झड़प या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल मौके पर मौजूद है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
महाराजा कंस पासी का शासनकाल कब था?
इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाराजा कंस पासी ने अवध क्षेत्र में साल 980 से 1031 ईस्वी तक शासन किया था।
मलिहाबाद विवाद में पासी समाज की मुख्य मांग क्या है?
पासी समाज का दावा है कि वह स्थल महाराजा कंस का किला और शिव मंदिर था, जिसे अब पुनर्जीवित किया जाए और अवैध कब्जे को हटाया जाए।