UP: लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला में एक पुराने ढांचे को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद गहरा गया है। बकरीद के त्योहार के दौरान तनाव न बढ़े, इसके लिए प्रशासन ने विवादित स्थल पर नमाज और किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगा
UP: लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला में एक पुराने ढांचे को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद गहरा गया है। बकरीद के त्योहार के दौरान तनाव न बढ़े, इसके लिए प्रशासन ने विवादित स्थल पर नमाज और किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और PAC तैनात किया गया है।
पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए?
प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और विवादित स्थल की ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। कानून-व्यवस्था को देखते हुए दोनों समुदायों के 20-20 लोगों, कुल 40 व्यक्तियों को पाबंद किया गया है। मलिहाबाद प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि क्षेत्र में पूरी तरह शांति है और बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को बंद कर दिया गया है ताकि कोई जमावड़ा न हो सके।
विवाद की मुख्य वजह और दोनों पक्षों के दावे क्या हैं?
पासी समुदाय का दावा है कि यह ढांचा 11वीं सदी के महाराजा कंस पासी का प्राचीन शिव मंदिर और किला है। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे सदियों पुरानी मस्जिद और मकबरा मानता है। लाखन आर्मी और सुहेलदेव आर्मी जैसे संगठनों ने इस स्थल की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जांच कराने की मांग की है। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यदि बकरीद पर यहां कुर्बानी दी गई तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे।
पिछले कुछ दिनों में क्या-क्या हुआ?
25 मई को जुमे की नमाज के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाखन आर्मी के 15 सदस्यों पर मामला दर्ज किया था। 26 मई को जिला प्रशासन ने विवादित स्थल पर नमाज और सुंदरकांड जैसे कार्यक्रमों पर रोक लगा दी। बुधवार को दो लोग पुरातत्व अधिकारी बनकर ढांचे की वीडियोग्राफी करते पाए गए। जिलाधिकारी विशाख जी ने सभी अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के निर्देश दिए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कसमंडी कला विवादित स्थल पर फिलहाल क्या स्थिति है?
वर्तमान में विवादित स्थल पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि, नमाज या सुंदरकांड पाठ पर प्रतिबंध है। वहां भारी पुलिस बल और PAC तैनात है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
पासी समुदाय और मुस्लिम समुदाय के दावे क्या हैं?
पासी समुदाय इसे महाराजा कंस पासी का शिव मंदिर और किला बता रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे एक पुरानी मस्जिद और मकबरा मानता है।