Lucknow के मलिहाबाद में आम के पेड़ों की अवैध कटान, बिना टीपी दौड़ रही लकड़ी लदी ट्रॉलियां
Lucknow/Malihabad: लखनऊ का मलिहाबाद इलाका अपने दशहरी आम और पुराने बागों के लिए मशहूर है, लेकिन अब यहां के हरे-भरे पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। आरोप लग रहे हैं कि क्षेत्र में आम के कलमी पेड़ों को अवैध तरीके से काटा जा रहा
Lucknow/Malihabad: लखनऊ का मलिहाबाद इलाका अपने दशहरी आम और पुराने बागों के लिए मशहूर है, लेकिन अब यहां के हरे-भरे पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। आरोप लग रहे हैं कि क्षेत्र में आम के कलमी पेड़ों को अवैध तरीके से काटा जा रहा है और लकड़ी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना ट्रांजिट पास (TP) के सड़कों पर दौड़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने इस पूरे खेल में वन विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नियमों की बात करें तो उत्तर प्रदेश सरकार ने आम, नीम और शीशम समेत 29 प्रमुख पेड़ों को काटने पर लगी रोक को 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ा दिया है। बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ काटना कानूनी अपराध है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। अगर किसी को पेड़ काटना है, तो ऑनलाइन आवेदन करना होगा और एक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाने का शपथ पत्र देना अनिवार्य है। इसके अलावा, वन विभाग एक पौधे के लिए 100 रुपये जमा कराता है, यानी 10 पौधों के लिए एक हजार रुपये और रोपण का खर्च अलग से देना होता है।
मलिहाबाद के फलपट्टी क्षेत्र में मई 2026 में लकड़ी माफियाओं ने नियमों को ताक पर रखकर दर्जनों फलदार पेड़ काट डाले थे। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की जानकारी के बिना इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान संभव नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी मलिहाबाद रेंज से 53 पेड़ों के गायब होने की खबर आई थी। हालांकि, वन विभाग ने इन शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी कार्रवाइयां हुई हैं। फरवरी 2026 में आगरा के एक मामले में सरकार ने NGT को बताया कि उसने उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के तहत 7 लाख रुपये से अधिक की वसूली की है। वहीं जून 2026 में कानपुर में 722 पेड़ों की अवैध कटान के मामले में एक वन दारोगा को निलंबित किया गया और पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई पेड़ आंधी या तूफान से गिर जाता है, तो उसे हटाने के लिए भी वन विभाग की अनुमति लेना जरूरी होता है।