UP : लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला गांव में एक पुराने ढांचे को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ गया है। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने यहां किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब इस जगह पर न तो न
UP : लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला गांव में एक पुराने ढांचे को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ गया है। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने यहां किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब इस जगह पर न तो नमाज पढ़ी जाएगी और न ही पूजा-पाठ होगा। पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती की गई है ताकि गांव में शांति बनी रहे।
विवाद की वजह और अब तक क्या हुआ
यह मामला 22 मई को तब शुरू हुआ जब एक समुदाय के सैकड़ों लोग इस ढांचे को मकबरा बताकर वहां नमाज पढ़ने पहुंचे। इसके बाद पासी समाज के लोग भी बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। पासी समुदाय का दावा है कि यह 1031 ईस्वी के राजा कंस का शिव मंदिर है, जिसे बाद में बदल दिया गया। तनाव को देखते हुए शनिवार 23 मई को प्रशासन ने अगले आदेश तक यहां सभी धार्मिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं
जिलाधिकारी विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पासी समुदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी और कुछ अन्य लोगों को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है। मलिहाबाद प्रभारी सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि पीएसी बल तैनात है और किसी भी व्यक्ति को ढांचे के पास जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
पुरातत्व विभाग और समुदायों का दावा
मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह सैकड़ों साल पुराना मकबरा और मस्जिद है, जिसका जिक्र 1862 के नक्शे में भी है। वहीं पासी समाज दीवारों पर बने कलश और नाग की आकृतियों को मंदिर होने का सबूत मान रहा है। इस बीच पुरातत्व निदेशालय ने साफ किया है कि यह स्थल अभी उनके पास संरक्षित नहीं है। प्रशासन से पत्र मिलने के बाद ही यहां की जांच की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मलिहाबाद के विवादित ढांचे पर प्रशासन ने क्या फैसला लिया है?
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अगले आदेश तक इस ढांचे में नमाज, पूजा और किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
पासी समुदाय और मुस्लिम समुदाय का इस जगह को लेकर क्या दावा है?
पासी समुदाय इसे राजा कंस का शिव मंदिर बता रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे पुराना मकबरा और मस्जिद बताकर वहां नमाज पढ़ने का दावा करता है।