UP: लखनऊ के मलिहाबाद इलाके के कसमंडी में एक पुराने ढांचे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू पक्ष ने इस ढांचे की जांच के लिए ASI और पुरातत्व निदेशालय से मांग की है और इसके लिए 7 दिन का समय दिया है। माहौल को देखते हुए प्र
UP: लखनऊ के मलिहाबाद इलाके के कसमंडी में एक पुराने ढांचे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू पक्ष ने इस ढांचे की जांच के लिए ASI और पुरातत्व निदेशालय से मांग की है और इसके लिए 7 दिन का समय दिया है। माहौल को देखते हुए प्रशासन ने वहां सभी तरह की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है
कसमंडी में स्थित इस ढांचे को लेकर दो पक्षों के बीच अलग-अलग दावे हैं। लखन आर्मी पासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी और हिंदू पक्ष का कहना है कि यह राजा कंस द्वारा 1031 AD में बनवाया गया एक प्राचीन शिव मंदिर है। वे दीवारों पर बने कलश, सांप और फूलों के निशान को सबूत बता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह एक मजार और मस्जिद है, जहां लंबे समय से नमाज पढ़ी जा रही है।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं
तनाव बढ़ता देख लखनऊ पुलिस और प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। डीएम विशाख जी और जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस बबलू कुमार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निर्देश दिए हैं। फिलहाल वहां नमाज और पूजा दोनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सुरक्षा के लिए भारी संख्या में PAC बल तैनात किया गया है ताकि कोई भी पक्ष कानून हाथ में न ले और शांति बनी रहे।
पुरातत्व विभाग का इस पर क्या कहना है
पुरातत्व निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह साइट फिलहाल उनके संरक्षित स्मारकों की लिस्ट में नहीं है। विभाग ने बताया कि उन्हें अभी तक इस मामले में जांच के लिए कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। अगर प्रशासन की तरफ से औपचारिक पत्र आता है, तभी इस ढांचे की वैज्ञानिक जांच की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मलिहाबाद के विवादित ढांचे पर वर्तमान स्थिति क्या है?
वर्तमान में वहां पुलिस ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा के लिए PAC तैनात है और किसी भी तरह की पूजा या नमाज की अनुमति नहीं दी गई है।
हिंदू पक्ष की मुख्य मांग क्या है?
हिंदू पक्ष का दावा है कि यह एक प्राचीन शिव मंदिर है। उन्होंने मांग की है कि Archaeological Survey of India (ASI) और पुरातत्व निदेशालय इस ढांचे की जांच करे।