UP: लखनऊ में बहुजन निर्बल वर्ग समिति से जुड़ी जमीनों के घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से साल 201
UP: लखनऊ में बहुजन निर्बल वर्ग समिति से जुड़ी जमीनों के घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से साल 2016 से 2024 तक का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। यह मामला अपात्र लोगों को जमीन बेचने और नियमों की अनदेखी से जुड़ा है।
विजिलेंस ने LDA से क्या जानकारी मांगी है?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विजिलेंस ने LDA से पिछले 8 साल का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का आवंटन किया गया। कोर्ट ने पहले इस मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद सितंबर 2025 में केस विजिलेंस को सौंपा गया था।
कौन-कौन लोग जांच के दायरे में हैं?
इस घोटाले में समिति के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण सिंह बाफिला और पूर्व सचिव लखन सिंह बालियानी समेत कई लोगों पर धोखाधड़ी का आरोप है। इसके अलावा 2009 से 2019 के बीच LDA में तैनात रहे 30 से ज्यादा अधिकारी, जिनमें IAS, PCS और इंजीनियर शामिल हैं, उनकी भूमिका की जांच हो रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।
समिति ने नियमों का उल्लंघन कैसे किया?
बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति का गठन अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की मदद के लिए किया गया था। आरोप है कि समिति ने नियमों के खिलाफ जाकर अपात्र लोगों को भूखंड बेचे। हाईकोर्ट ने अब पिछले 10 साल की संपत्ति बिक्री का ऑडिट कराने और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से पूरी जांच की निगरानी कराने का आदेश दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विजिलेंस ने LDA से कितने साल का रिकॉर्ड मांगा है?
विजिलेंस ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से वर्ष 2016 से 2024 तक के 8 साल का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है ताकि जमीन आवंटन की अनियमितताओं की जांच की जा सके।
इस मामले की जांच EOW से विजिलेंस को क्यों सौंपी गई?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा की गई जांच पर असंतोष जताया था, जिसके बाद सितंबर 2025 में जांच राज्य सतर्कता विभाग (Vigilance) को ट्रांसफर कर दी गई।