Lucknow में अब बिना फायर सेफ्टी के नहीं पास होगा बिल्डिंग मैप, छोटे भवनों के लिए शपथपत्र हुआ जरूरी
Lucknow: राजधानी लखनऊ में अब किसी भी भवन का नक्शा पास कराने के लिए फायर सेफ्टी सबसे पहली शर्त होगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में आग से होने वाले हादसों को रोकने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की है। अब बिना फायर सेफ
Lucknow: राजधानी लखनऊ में अब किसी भी भवन का नक्शा पास कराने के लिए फायर सेफ्टी सबसे पहली शर्त होगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में आग से होने वाले हादसों को रोकने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की है। अब बिना फायर सेफ्टी क्लियरेंस के बिल्डिंग मैप की मंजूरी नहीं मिलेगी।
LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस नए सिस्टम के आदेश जारी किए हैं। इस नियम के मुताबिक, जो कमर्शियल और पब्लिक बिल्डिंग्स फायर एनओसी (NOC) के दायरे में आती हैं, उन्हें पहले फायर विभाग से एनओसी लेनी होगी, तभी उनका नक्शा पास होगा। वहीं, जो बिल्डिंग्स अनिवार्य एनओसी के दायरे में नहीं आती हैं, जैसे 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले होटल, स्कूल, अस्पताल और कोचिंग सेंटर, उनके मालिकों को अब एक शपथपत्र (Affidavit) देना होगा। इस शपथपत्र में उन्हें यह भरोसा देना होगा कि उन्होंने फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के सभी नियमों का पालन किया है।
नियमों के अनुसार, शपथपत्र देने वाले भवन मालिकों को नक्शा पास होने के तीन महीने के भीतर फायर विभाग से सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना होगा या फायर ऑडिट कराना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। ये सभी नियम उत्तर प्रदेश फायर सेफ्टी एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट 2022 और रूल्स 2024 के तहत लागू किए गए हैं। केवल चार मीटर तक की ऊंचाई वाले सिंगल स्टोरी रिहायशी मकानों को इस शपथपत्र की जरूरत नहीं होगी।
यह पूरी व्यवस्था असेंबली बिल्डिंग, कमर्शियल दुकानों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, बैंक, सिनेमा हॉल और जिम जैसे उन सभी स्थानों पर लागू होगी जहां लोगों की भीड़ ज्यादा होती है। LDA अब इन शपथपत्रों का एक अलग रजिस्टर रखेगा और हर हफ्ते इसकी रिपोर्ट सचिव को भेजी जाएगी।
इसके साथ ही जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौजूदा इमारतों में बेसमेंट के गलत इस्तेमाल, पार्किंग और फायर सेफ्टी की जांच करें। अगर कोई बिल्डिंग बिना नक्शे के बनी है या रिहायशी मकान में कमर्शियल काम चल रहा है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। बता दें कि अलीगंज में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में बड़ी इमारतों का फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य कर दिया है और इसके लिए हर जिले में टास्क फोर्स बनाई जा रही है।