Lucknow का खत्री परिवार, जो 90 साल से संभाल रहा है देश के शहीदों की विरासत

Lucknow: लखनऊ के एक छोटे से कमरे में भारतीय आजादी की लड़ाई की अनमोल यादें सिमटी हुई हैं। यहाँ का खत्री परिवार पिछले 90 सालों से तीन पीढ़ियों तक देश के शहीदों की विरासत को सहेजने का काम कर रहा है। यह परिवार बिना किसी सरका

Lucknow: लखनऊ के एक छोटे से कमरे में भारतीय आजादी की लड़ाई की अनमोल यादें सिमटी हुई हैं। यहाँ का खत्री परिवार पिछले 90 सालों से तीन पीढ़ियों तक देश के शहीदों की विरासत को सहेजने का काम कर रहा है। यह परिवार बिना किसी सरकारी मदद या उम्मीद के केवल देशभक्ति की भावना से इस काम में जुटा हुआ है।

इस विरासत की शुरुआत रामकृष्ण खत्री ने की थी। उनका जन्म 3 मार्च 1902 को महाराष्ट्र के चिखली गांव में हुआ था। वे एक बड़े क्रांतिकारी थे और उन्होंने मध्य भारत व महाराष्ट्र में हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ का विस्तार किया था। काकोरी कांड में उन्हें 10 साल की कड़ी सजा हुई थी। 9 अगस्त 1925 को जब पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूटा था, तब उस मिशन की रेकी करने में रामकृष्ण खत्री ने अहम भूमिका निभाई थी।

रामकृष्ण खत्री ने 1937 से 1996 तक शहीदों की यादों को संजोने का काम किया। उन्होंने 1978 में ‘काकोरी शहीद स्मृति’ और 1983 में ‘शहीदों की छाया में’ नाम से किताबें लिखीं। लखनऊ के पास काकोरी शहीद स्मारक के निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। उनके बाद उनके बेटे उदय खत्री ने 1996 से 2023 तक इस जिम्मेदारी को निभाया और काकोरी केस के क्रांतिकारियों पर एक किताब तैयार की।

अब इस परंपरा को उनके पोते रोहित खत्री आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्होंने 2023 से यह जिम्मेदारी संभाली है। हाल ही में 9 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने काकोरी शहीद स्मारक पर रोहित खत्री को सम्मानित किया। इसी मौके पर मुख्यमंत्री ने शहीदों की वीरता पर आधारित किताबें जारी कीं और अमर शहीद वाटिका में 34 पौधे लगाकर इसका विस्तार किया।